ठहरो, ठहरो, ठहरो
गीता भट्ट/इलाहाबाद हिरण भागता रहा, भागता रहा उस महक के पीछे-पीछे। यानी कस्तूरी के पीछे-।रुकने का नाम नही? थक गया हार गया, एक ही रास्ता बचा रुकना । जब ठहरा तो सिर झुकाया तो पता पडा कि मै जिसके पीछे भागते जा रहा था, वो मेरे खुद के पास ही है । इस जीवन काल( मृत्युलोक) मे परीक्षा सभी को...