अब तो जिद ना करो, आ जाओ
अंजना शर्मा, प्रिंसिपल, गोरखपुर देखो मीत बसंती बयार चली, मौसम ने ली अंगड़ाई, धरती ने पिली चुनार ओढ़, घूँघट के पट है खोली, धरती के ये दृश्य देख, मन की हसरतो ने है, रट लगाई, एक मनुहार, सुनाई, अब तो जिद ना करो आ जाओ, किसी ने तेरी राहों में अपनी भीगीं पलकें है, बिछाई,,