ऐ वक़्त जरा ठहर जा…
ऐ वक़्त जरा ठहर जा…
अंजना शर्मा/गोरखपुर
ऐ वक़्त जरा ठहर जा,,,,
थोड़ा जी तो लूँ,,,,,,
ये अबूझ पहेली समझ तो लूं,
थक गई हूँ तेरे रफ्तार से,,,…
कुछ बीते वक़्त के अहसास,,,,,
कुछ ऐसी थोड़ा जो पूरी होते-होते,,,,,.
रह गई ,,,,,,,,
कुछ ऐसे अल्फाज जो कभी ,..
जुबान तक आते आते,,,,,,
एक ऐसा सफर जो शुरु होते,,,,.
मंजिल तक,,,,,,,,.. न गई,,,,
बस एक बार सपनो में सजा तो लूं,,,,,,
एक अधूरा गीत जरा गुनगुना तो लूँ,,,
उन खवाबों की कैद से निकल तो लूँ