इंग्लिशपुर गांव की अर्थव्यवस्था कैसे सुधरे?
इस प्रवास के दौरान मैं लगातार इंग्लिशपुर गांव की अर्थव्यवस्था के उत्थान के बारे में सोच रहा हूँ, पर अक्ल ज्यादा काम नहीं कर रही। यहाँ के लोगों को महीने में 2-3 हज़ार रुपये की जरूरत है। 100 ₹ प्रतिदिन,पर नियमित। वो कैसे आएगा, यही सोच रहा हूँ?
धर्मेंद्र कुमार इंग्लिशपुर गांव (भोजपुर) से लौटकर

गाँव का जीवन साहित्य, फेसबुक, कविताओं और फ़ोटो में सुंदर लगता है, पर कई ऐसी आधारभूत समस्याएं हैं जो यहाँ के जीवन को कठिन बनाती है और व्यक्ति को प्रवसन (MIGRATION) के लिए बाध्य करती हैं। जिसे हम प्रवसन का push factor कहते हैं। अपने मूल स्थान को छोड़ना अत्यंत पीड़ादायी होता है, मैं जानता हूँ। पर बेरोजगारी अपने चरम पर है। 18 साल से 40 वर्ष के आयु समूह के लोग दिखाई नहीं देते, गाँव छोड़ चुके हैं। और जो हैं वो दिन भर ताश खेलते हैं।
इस प्रवास के दौरान मैं लगातार यहाँ की अर्थव्यवस्था के उत्थान के बारे में सोच रहा हूँ, पर अक्ल ज्यादा काम नहीं कर रही। यहाँ के लोगों को महीने में 2-3 हज़ार रुपये की जरूरत है। 100 ₹ प्रतिदिन, पर नियमित। वो कैसे आएगा, यही सोच रहा हूँ?
कृषि प्रधान समाज में जल प्रबंधन का अभाव और निरंतर बाढ़-सूखा के साथ-साथ अब फसलों की बीमारी और नीलगायों के आतंक ने खेतिहर जीवन को मुश्किल में डाल रखा है।
यहाँ कृषि के अलावा रोजगार के दो ही कुल स्रोत हैं-
1.परिवहन- ऑटो, बस, बोलेरो आदि गाड़ियां चलाना।
शादियों और त्योहारों के सीज़न में ये व्यवसाय फायदेमंद है, पर बाकी समय मुश्किल से बैंक के किश्त निकलते हैं। और,
2. पशुपालन- गाय, भैंस , बकरी जैसे दुधारू पशुओं के माध्यम से लघु स्तरीय डेयरी(दूध) व्यवसाय।
परंतु कम से कम 3 दुधारू पशुओं के बिना sustain करना मुश्किल है।
इसमें भूसा घर का होना एक अनिवार्य शर्त है।
बिहार पहले से बहुत बेहतर स्थिति में है। विधि-व्यवस्था लगभग ठीक है। सड़क और बिजली की स्थिति भी संतोषजनक है। (दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारतीय विकसित राज्यों से तुलना न करें)।
परंतु जब तक दो उपाय नहीँ होगा, गरीबी, बेरोजगारी और प्रवसन जारी रहेगा-
1. नदियों का जल प्रबंधन। चाहे नदियों की इंटरलींकिंग हो या नहरों का जाल।किसान जब चाहे जल प्राप्त कर ले।और,
2. औद्योगिकरण(कृषि आधारित)! खाद्य प्रसंस्करण(food processing), सब्ज़ी, कॉस्मेटिक्स,औषधीय कृषि, वानिकी, मत्स्य,डेयरी, दुग्ध उत्पाद,मुर्गी आदि में मुझे अच्छी संभावनाएं दिखती है।
कृषि प्रधान समाज जब तक तीन फसल नहीँ उगाएगा तथा एक नियमित छोटे आय का प्रबंध नहीँ होगा,तब तक उसकी समस्याएं समाप्त नहीं होंगी।सिर्फ खेती काफी नहीँ है।प्रवसन जारी रहेगा।
किसानों को भी out of box जा कर सोचना होगा।सिर्फ सरकार के भरोसे रहना ठीक नहीं है।मेरे पड़ोस के गांव पांडेपुर ने सब्ज़ी की खेती कर काफी तरक्की की है।
हम सब शहरों के स्थापित हो चुके लोग हैं जो nike, rayban,levis पहन कर, अपने अपने गांव में फ़ोटो खींच कर अच्छे अच्छे कैप्शन के साथ सोशल मीडिया पर शेयर करते रहते हैं।
पर मज़ा तो तब आएगा जब किसान rayban और nike पहन कर खेती करे। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान ऐसा कर रहे हैं। बाकी देश के किसान भी कर सकें, यही कामना है।
“अब मैं राशन की कतारों में नज़र आता हूँ,
अपने खेतों से बिछड़ने की सज़ा पाता हूँ।”
Comments on his facebook wall:
Sushilnath Kumar: ज़बरदस्त गुरूजी …..😊👌👌👌पीछे नदी कौन-सी है?
Dharmendra Kumar: गंगा, उसके पीछे UP
Sushilnath Kumar: बहुत रमणीक जगह है सर…👌👌👌
Jitendra Jaiswal: आलराउंडर है आप गुरु जी😂
Roy Tapan Bharati: बहुत अच्छी रिपोर्ट गांव पर। हम इसे khabar-india.com पर प्रकाशित करने जा रहे हैं। धन्यवाद।
Vikas Kaushal सर आपकी लेखन शैली बहुत ही सुंदर है, खासकर जब आप ग्रामीण परिवृष्ट की जीवंत व्याख्या करते है।…मन होता है,एक बार गरमी की छुट्टी इंगलिशपुर मे गुजारी जाये…
Sidharth Shambhu मेरा अपना अनुभव के हिसाब से यदि food processing unit और storage की समस्या खत्म हो जाय तो बिहार का कायाकल्प हो जाय
Dharmendra Kumar मुझे water management अनिवार्य लगता है। खेती को बिना बाढ़ सूखा से मुक्त कराए, किसान के आय को नियमित करना मुश्किल है।
Pankaj Singh Shrinet रोजगार के रास्ते मे परम्परा भी एक बाधा है सर जैसा कि आपने #सुअरिआ वाले बाबा जी के example से बताया था ।।।।
Angesh Singh मिर्च के खेत में कुल्हाड़ी???
Dharmendra Kumar सर, कुल्हाड़ी नही कुदाल है।ठीक से देखा जाए, पतली नोक वाली।
Deepesh Kumar Yadav 1-सर आपने भूसा लिखा है बहुतो को समझ नही आएगा की ये क्या होता है।
2-सर बिहार मतस्य उत्पादन करने की बहुत प्रयास किया पर यहाँ लोग एक दूसरे से इतने जलनसील हो गए है की कोई किसी को बढ़ते देखना ही नही चाहता रात में जाकर उसके पोखर(तालाब) में जहर डालने की घटना मैंने बहुत देखा और सुना है इसलिए ये सफल नही हो पा रहा है।
Nitesh Ranjan ।।।21वी सदी का किसान।।।। गमछा के बजाय हाफ पैंट विथ काला चश्मा।।।।,😎😎😎😎
Angesh Singh अब आप राजनीति में आ जाइये। क्योंकि सारे समस्या का समाधान वहीं से निकलता है।
Dharmendra Kumar फिलहाल कोई इक्षा नहीं है।5 साल बाद विचार करूँगा।
Rakesh Dhar Dwivedi मनरेगा में काम करना पसंद नही करते।
Lokendra Yadav Sir आपकी किसान के रूप में देखकर englishpur का हर किसान सुखी महसूस करता होगा, उनके पास एक ऐसा किसान है जो world wide सोच रखता है, और उनकी समस्या का समाधान करेगा।।।
Surender Punia प्रणाम जी | जीवन के सभी अनुभव का आनन्द ले रहे हो बहुत अछे |
Nitish Kumar बिल्कुल सही कहा गुरु जी आपने।
आपके तस्वीर और आपकी बातों से गाँव की वो सोंधी-सोंधी महक .. किसानों की पीड़ा उनकी दबी आवाज….आर्थिक तंगी…साफ़ झलक रही है।
Vaibhav Para Englishpur Ka Modern Kisan
Garima Sahani Modern farmer ki modern thoughts….
Dharmendra Kumar लाठी, गोली खिया के मनब बाबा?🤣
Ravish Yadav काश आप जैसी किस्मत हो जाये किसानों की, आप जैसे स्टाइल में घूमें
Dharmendra Kumar फ़ोटो खिंचवाने में मिट्टी कैसे लगेगी?😂🤣
हरिओम प्रासाद राय भट्ट बहुत ही अच्छा समाजिक विषयवस्तु पर आप ने लोगों का ध्यान करवाया है, तरीका बहुत सहज ही, हम सब को इस पर गौर करना चाहिए।
Rajeev Kumar Mishra अब किसानी होई का सर जी।