आँखे खुलीं तो देखा कि बहन का ब्रीफकेस गायब
गर्मी की रात और तेज पूर्वी बयार। बैठे-बैठे आँखे झपकने लगी थी। चाहकर भी नींद रुक नहीं पा रही थी। बहन बैठी हुई कब सो चुकी थी मुझे पता ही नहीं चला। पांच मिनट मुश्किल से मेरी आँखे लगी होंगी। आँखे खुलीं तो देखा कि बहन का ब्रीफकेस गायब।
श्रीकांत राय/पटना

बात आज से 26 वर्ष पूर्व की याद आ रही है। जब मेरा छोटा बेटा विकास का जन्म हुआ था। मैं अपनी छोटी बहन के घर गया हुआ था। उसकी नई-नई शादी हुई थी। भागलपुर के गोकुला गांव से बिदाई करा कर अपने घर वापस आ रहा था। रात के करीब 12 बज चुके थे।हम दोनों भाई-बहन भागलपुर स्टेशन के 4 नंबर प्लेटफार्म पर बैठे रेलगाड़ी का इंतजार कर रहे थे। गर्मी की रात और तेज पूर्वी बयार। बैठे-बैठे आँखे झपकने लगी थी। चाहकर भी नींद रुक नही पा रही थी। बहन बैठी हुई कब सो चुकी थी मुझे पता नही चला। पांच मिनट मुश्किल से मेरी आँखे लगी होगी।आँखे खुली तो देखा कि बहन का ब्रीफकेस गायब।
लाख कोशिश के बाद भी पता नहीं चला। बहन का सारा सामान उसी में था। मैं काफी बेचैन था। पागलों की भांति सारे यात्रियों के ब्रीफकेस को निहारने लगे। कुछ यात्रियों की निगाह में मैं खुद शक के घेरे में आने लगा। एक यात्री ने मुझे पास बुलाकर कहा, सामान को ऐसे क्यों घुर रहे हो? तब तक ट्रेन प्लेटफार्म में लग चुकी थी। हम दोनों रेलगाड़ी में सवार हुए और घर वापस आ गये। घर के लोगों को पता चला कि सामान खो गया है। कुछ देर तक वातावरण गमगीन रहा।फिर स्थिति सामान्य हो गई।
मेरी बहन की शादी के बाद पत्नी मायके चली आई थी। वहीं 9 जून 1991 को विकास का जन्म हुआ। बच्चा बहुत कमजोर था। स्थानीय डॉ क्टर अपने पास रखने के लिये तैयार नहीं हुई। तब तक मैं भी वहां पहुंच चुका था।
उस समय मैं स्थानीय इंटर कॉलेज में हिंदी के व्याख्याता के पद पर कार्यरत था। कॉलेज सम्बद्धता प्राप्त था। मैं शुक्रगुजार हूं कंकड़बाग स्थित डॉक्टर भवनानी का जिन्होंने इसे जीवन-दान दिया। आज मेरा विकास अपने जीवन का 26 वां बसन्त पूरा कर लिया है और अपनी ट्रेवेल कंम्पनी इजिगेट होलिडेज का डायरेक्टर है। विकास आपके आशीर्वाद से निरंतर विकास कर रहा है।
आज (10 June) विकास का जन्मदिन है। गुरुमहाराज से प्रार्थना है कि इस पर दया करें। मेरी तरफ से अशेष एवं अनन्त शुभकामनाएं विकास बेटा ! मित्रों और सगे सम्बन्धियों से मेरा निवेदन है कि इसे अपने आशीर्वचनों से अभिसिंचित करें।