युवा-शक्ति के बल पर हम भारत को पुनः सजायेंगे
आलोक शर्मा/ महराजगंज, उत्तर प्रदेश
राष्ट्रवंश के हे! नव किसलय हम सबके सम्मान हो तुम!
बाघ स्वयं की रक्षा कर ले, पशु योनि में आता है;
गिरि कानन जो भ्रमण करे वह नव कुंजल कहलाता है!
बन जाओ सिंह-भवानी के, गीता और कुरान हो तुम;
राष्ट्र वंश के हे! नव किसलय हम सबके सम्मान हों तुम!
धर्म-पन्थ और भेद-भाव, बँटवारो का निर्धारण है;
जो नहीं समझ पाये अबतक वह पूर्वाग्रह का कारण है!
जाति बनी है कर्मो पर सुकर्मो की पहचान हो तुम;
राष्ट्रवंश के हे!नव किसलय हम सबके सम्मान हो तुम!
जिस पथ पर तेरा कदम बढ़ा कुछ कांटे निश्चित आएंगे;
युवा-शक्ति के बल पर हम भारत को पुनः सजायेंगे
गुप्तवंश का युग आएगा चाणक्य रक्त औज्ञान हो तुम;
राष्ट्रवंश के हे! नव किसलय हम सबके सम्मान हो तुम!
मुठ्ठी-भर ही भारत-वासी, धन-बैभव को पाये हैं;
प्रेमचन्द का चादर सिलकर बाँकी काम चलाये हैं!
कर्म करो कुछ अद्भुत ऐसा, नवयुग के अभियान हो तुम;
राष्ट्र वंश के हे! नव किसलय हम सबके सम्मान हो तुम!
बोले आज विपक्ष मगर, कल निश्चित चुप हो जायेगा;
घर-घर में खुशियाँ होंगी जब, हर चेहरा मुस्कायेगा!
इनका स्वर भी बोल उठेगा पुत्र बहुत महान हो तुम;
राष्ट्र वंश के हे !नव किसलय हम सबके सम्मान हो तुम !