क्या भट्टों की सामान्य ब्राह्मणों में शादी होती है?
छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में अब भट्ट समाज से सामान्य ब्राह्मणों में लड़की दी और ली दोनों जा रही है। वो भी पूरे सम्मान के साथ यह जानते हुए भी कि हम ब्रह्मभट्ट हैं।
प्रमोद ब्रह्मभट्ट, वरिष्ठ पत्रकार/ रायपुर

कल से ही मैंने मैसेन्जर पर लोगों के सवालों का जवाब देना शुरू किया है। नई-नई तकनीकि को समय के साथ सीखना पड़ता है और उसका उपयोग भी करना पड़ता है। ऊपर से अपनी व्यस्तता के बीच स्वाजातियों की छोटी-मोटी जिज्ञासाओं को शांत करना पड़ता है। कल एक सज्जन ने मुझसे पूछा कि क्या छत्तीसगढ़ में भट्ट ब्राह्मणों का सामान्य ब्राह्मणों से रोटी-बेटी का संबंध है। मैंने कहा सामान्यतया नहीं लेकिन विशेष परिस्थियों में हां। उन्होंन प्रतिउत्तर किया कि क्या वे सिर्फ नाम के ब्राह्मण हैं। उस पर उन्होंने यह भी जताया कि वे ब्रह्मभट्ट समाज का उत्थान चाहते हैं। रोड मैप पूछने पर उन्होंने गूगल मैप बता दिया।
छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में अब भट्ट समाज से सामान्य ब्राह्मणों में लड़की दी और ली दोनों जा रही है। वो भी पूरे सम्मान के साथ यह जानते हुए भी कि हम ब्रह्मभट्ट हैं। पिछले हफ्ते जनसंपर्क विभाग में एक द्विवदी पत्रकार सज्जन टकराए और मेरा सरनेम पूछने के बाद उन्होंने कहा कि हम लोग वैसे तो मूलतः यूपी से हैं लेकिन मध्यप्रदेश में बस गए हैं। मेरी एक बेटी ब्रह्मभट्टों में गई है इसलिए आप और मैं रिश्तेदार हुए । वर्तमान में वे रायपुर अपने बेटे के साथ रह रहे हैं उन्होंने घर भी आमंत्रित किया। मैं ऐसे कई परिवारों को जानता हूं जिनके यहां तिवारी, उपाध्याय, झा आदि परिवारों में रिश्तेदारी हुई है। हालांकि ये सारे रिश्तेदार शर्मा उपनाम ही लगाते हैं।
ख्याल आया, दो साल पहले मेरी दूर की बुआ के लड़के (शर्मा) ने कहा कि लड़की का तिलक लेकर रीवां जाना है तिवारी परिवार में, लेकिन मेरा निवेदन रहेगा कि आप अपना सरनेम या तो शर्मा बताएंगे या फिर कुछ नहीं बताएंगे। तब मैंने उसे लगभग डांटते हुए कहा कि हम तिलक लेकर जाने वाले हैं या किसी के लड़के का अपहरण करने जा रहे हैं जो अपना सरनेम बदलेंगे। अगर उनकी सोच ऐसी है तो यह होने वाला रिश्ता तोड़ दो लड़की वहां सुख नहीं पाएगी। या तो मैं तिलक में नहीं जाउंगा और गया तब कोई पूछा तो अपना सरनेम ब्रह्मभट्ट ही बताऊंगा। खैर कुछ दिनों के बाद मेरे भाई खुद मिलने आया और कहा, लड़के वालों से बात हो चुकी है। आपकी मर्जी आप जैसा चाहें अपना परिचय दें लेकिन आपको तिलक में चलना है। आपके बगैर बात नहीं बनेगी।
रीवां से 17 किलोमीटर दूर गांव में तिलक था। उस गांव की आबादी बमुश्किल हजार बारह सौ रही होगी लेकिन तिलक समारोह में एक हजार से कम भीड़ आई थी । मेरे लिए ये अपने तरह का पहला अनुभव था। क्या वहां लोगों के पास काम नहीं होता जो एक बच्चे का तिलक समारोह देखने आसपास के गांव वाले पहुंचे थे। हमने तिलक समारोह पूरा किया और एक मिश्राइन जो सबसे ज्यादा चंचल थीं। उन्होंने उलहना दिया सबको शादी का निमंत्रण दे रहे है, हमको नहीं देंगे।
मेरा भाई ने जवाब दिया पुरानी परंपरा को छोड़िए अब महिलाएं भी शादी में आने लगी हैं। आप हमारे घर बिलासपुर छत्तीसगढ़ आइए आपका विशेष सम्मान होगा। ट्रेन में मैंने अपने भाई से कहा मिश्राइन ने मेरा परिचय लिया है और वो ब्रह्मभट्ट परिवार में मेहमानी करने नहीं आएगी। मेरे भाई ने कहा लगी शर्त वो जरूर आएगी आप देखते रहना। मिश्राइन बारात के साथ सजधज कर शादी में शामिल होंने बिलासपुर पहुंचीं और मेरे भाई ने समधिन का सम्मान छत्तीसगढ़ की कोसा साड़ी से किया।
शादी के बाद पारिवारिक पूछताछ में 15 मिनट में पता चल गया कि जिस गांव में हमारे रिश्तेदार भट्ट लिखते हैं उसी गांव में उनके रिश्तेदार शर्मा लिखते हैं। गांव वही है लेकिन रिश्तेदारी अलग-अलग परिवारों में है। लड़का और लड़की रायपुर में ही रह रहे हैं। सब ठीक चल रहा है अब हमारी भतीजी एक बच्चे की मां भी बन गई है। कहना साफ है जमाना बदल रहा है सर्वब्राह्मण समाज में हम प्रमुखता से शामिल होते हैं। क्या आप लोग नहीं बदलेंगे।