जिन्होंने जीवन पर्यन्त इंसानी रिश्ते को महत्व दिया
पिता स्व. शशिभूषण राय, पूर्व डीएसपी, बिहार: ऐसा व्यक्तित्व जिन्होंने जीवन पर्यन्त इंसानी रिश्ते को ही महत्व दिया। ऐसा व्यक्तित्व जिनको पिता, भाई, मामा, फूफा आदि जैसे पारिवारिक रिश्ता मात्र में बांधकर नही रखा जा सका।
नवीन कुमार राय/जमशेदपुर
आज वर्तमान विदेशी परंपरा के अनुसार फादर्स दिवस (16 June) है। वैसे माता-पिता के लिए एक विशेष दिवस हो, यह उचित तो नहीं है। फिर भी अगर दिवस है, तो कुछ बुरा भी नहीं है। अपने पिता के किस रूप को आज याद करूँ? विविधताओं से भरा चरित्र था उनका। मैंने अपने इस छोटे से जीवन में ऐसा व्यक्तित्व नही देखा।
ऐसा व्यक्तित्व जिन्होंने जीवन पर्यन्त इंसानी रिश्ते को ही महत्व दिया। ऐसा व्यक्तित्व जिनको पिता, भाई, मामा, फूफा आदि जैसे पारिवारिक रिश्ता मात्र में बांधकर नहीं रखा जा सका। इनकी स्मरण शक्ति, तीव्र बुद्धि, असीमित ज्ञान, कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराते रहने की कला, सरकारी सेवा में रहते हुए कर्तव्य के प्रति समर्पण आदि एक सामान्य इंसान की तुलना में कहीं अधिक थी।
हर इंसान को ऐसे पिता पर गर्व होना चाहिए और हमें भी अपने पिता पर गर्व है। आज भी उनके नाम की छाया तले मैं अपने को सुरक्षित महसूस करता हूँ। ऐसा चरित्र शायद कभी नहीं मरता, फर्क सिर्फ इतना होता है कि, सशरीर वह उपस्थित नही रहता। पर उनके नाम का प्रभाव अपनी उपस्थिति बनाए रखता है।
पापा, मैं अभी भी यह स्वीकार नही कर पा रहा हूँ कि, आप हमारे साथ, हमारे बीच मौजूद नहीं हैं। शायद इसलिए कि आप एक कवच के रूप में अपने आशीर्वाद के साथ हमेशा हमारे साथ होने का आभाष देते रहते हैं। फिर भी यह सत्य है कि आपके स्पर्श को महसूस नही कर सकता, जिसके लिए आपका सशरीर होना जरुरी था।
आज पुनः आपको शत-शत नमन करता हूँ और आपका आशीर्वाद हमारे पूरे परिवार पर बनी रहे, यही आपसे चाहता हूँ, जो हमारा हक है।
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