नवहट्टा गांव, जो पान-माछ-मखान के लिए मशहूर है
सहरसा से नवहट्टा की दूरी 22 किलोमीटर है जिसे निजी वाहन द्वारा 30 मिनट से कम समय में तय की जा सकती है। लगभग 90% घर पक्के हैं। कई NGO भी यहाँ कार्यरत हैं। गाँव में 22-23 घंटे की बिजली आपूर्ति की जाती है।
त्रिपुरारी राय ब्रह्मभट्ट/सहरसा

यहाँ के लोग आर्थिक रूप से सबल और आत्मनिर्भर हैं| सरकारी और निजी क्षेत्र के अतिरिक्त यहाँ के लोग खेती भी खूब करते हैं। यह क्षेत्र मिथिला का कहलाता है। यहाँ पान-माछ-मखान की प्रसिध्धि है। यहाँ मखाना की खेती व्यापक पैमाने पर की जाती है। मखाना के अतिरिक्त देशी और विदेशी नश्ल के मछलियों का भी उत्पादन किया जाता है। यहाँ का कबय, इचना, पोठी आदि मछली काफी नामी है। गरमा और अगहनी धान, मकई, मूंग, गेहूं (अल्पमात्रा में) आदि की भी खेती की जाती है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी यहाँ सरस्वती का वास है। यहाँ पूर्व प्राथमिक से लेकर प्लस टू तक के सरकारी विद्यालय हैं। गाँव के 10 km की दूरी पर महाविद्यालय भी है। कई गैर सरकारी और निजी विद्यालय भी हैं जिसमें अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई होती है। गाँव की सभी सड़कें पक्की और नालियों सहित निर्मित है। मुख्य सड़कें जो सहरसा को जोडती है पक्की है। सहरसा से नवहट्टा की दूरी 22 किलोमीटर है जिसे निजी वाहन द्वारा 30 मिनट से कम समय में तय की जा सकती है। लगभग 90% घर पक्के के हैं। कई NGO भी यहाँ कार्यरत हैं। गाँव में 22-23 घंटे की बिजली आपूर्ति की जाती है। यहाँ विदुत सब-स्टेशन, पेट्रोल पम्प, सुव्यवस्थित सरकारी और निजी चिकित्सालय, एक्सरे और पैथोलोजी सेंटर के अलावे बड़ा बाज़ार भी है।
अपने स्वजाति के यहाँ पर लगभग 30 घर हैं। लगभग 50% स्वजाति सरकारी सेवा में हैं। शेष निजी सेक्टर, स्वयं के व्यवसाय अथवा खेती करते हैं। यहाँ के कई लोग दिल्ली, नोएडा, गुजरात, उत्तर प्रदेश आदि के बड़े शहरों में सफल निजी व्यवसाय कर रहे हैं। नवहट्टा के कुछ स्वर्गीय हो चुके व्यक्तित्व में प्रमुख हैं- स्व. पंडित सहदेव कवि, स्व. गुलाब महाराज, स्व. सुधीर महाराज आदि।|

(लेखक सहरसा में सरकारी शिक्षक हैं)