तो ये नारी अबला क्यों कहलाये …
वो हर बात पर अगर मौन हो जाये,
तो दुनिया की निगाह में नारी है,
अपने अधिकार की आवाज उठाली ..
तो फिर बदचलन ये नारी ही कहलाये…
सब के हिस्से का दर्द सहे..
सब को भरपेट भोजन दे कर भूखी ये रहे,
जानवरों की तरह सिर हिलाये नारी है..
अपने दुख दर्द किसी से साझा जो किया..
तो फिर कामचोर नारी ही कहलाये…
तन भी सौंपे, मन भी सौंपे..
प्रियतम के जीवन में हर रंग ये भर दे..
पुरुष को पिता और पति का मान दिलायी तो नारी है..
पर पत्नी के अधिकार की जब बात बताये..
तो फिर पतिव्रता का पाठ जग नारी को पढ़ाये…..
कभी रो ली बंद पलकों में,
कभी बंद होठों से मुस्कुराये..
शक्ति रूप है जीवनदायिनी ये..
पर जब समान अधिकार की बात हो ..
तो ये नारी अबला क्यों कहलाये …
✍✍रागिनी