मैं सृष्टि, मैं जुनून हूँ
मैं धरती की वजूद हूँ,
मां के चरणों की धूल हूँ
बाबुल की बगिया की फूल हूँ,
मैं ही छाँव और धूप हूँ,
मैं सृष्टि मै जुनून हूँ।।।।
मै इक्षाओं का बलिदान हूँ,
मैं भारत का संविधान हूँ,
मैं धरती-गगन की शान हूँ,
मैं मां दुर्गा की त्रिशूल हूँ।
मैं सृष्टि मै जुनून हूँ।।।।
खुद रोकर सबको हँसाती हूँ,
हर दर्द को दिल मे दबाती हूँ,
मैं घर को स्वर्ग बनाती हूँ।
मैं दुष्टों के पग की शूल हूँ,
मैं सृष्टि मैं जुनून हूँ।।
तुम मान हमारा दे न सके,
सही सम्मान हमारा दे न सके,
वो अभिमान हमारा दे न सके,
मैं तुम्हारा अंग और खून हूँ,
मैं सृष्टि मैं जुनून हूँ।।।
पकड़ कर हाथ ,मेरे साथ चलो,
लेकर नई सुबह नई आश चलो,
लेकर इरादे बुलन्द और खास चलो,
मैं गौरव मैं प्रसून हूँ ,
मैं सृष्टि मैं जुनून हूँ।।।।।।
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