दुबई में राखी प्रचलित नहीं, ये सिर्फ परिवार का उत्सव

दुबई से “अशोक शर्माजी” लिखते हैं:
दुबई में राखी ज्यादा प्रचलित नहीं है. ये सिर्फ फॅमिली के अन्दर का एक उत्सव है. इस बार राखी छुट्टी वाले दिन नहीं है तो कुछ ज्यादा करने को नहीं है. हम सिर्फ राखी बांधेंगे जो बहनों ने भेजा है, मिठाई खायेंगे और फिर काम पर जायेंगे.
(In 2015 ) आज शाम 6.30 बजे मुझे मेरी बहन की भेजी राखी मिल गई. बहुत ख़ुशी हुई वरना मै थोडा मायुस था की उसने राखी भेजी लेकिन मिल नहीं पाई. मेरी बहन सीमा कानपूर में रहती हैं. उनके पति अविनाश जी आर्डिनेंस फैक्ट्री में Jt. General Manager हैं. अविनाश जी हाजीपुर बिहार के रहने वाले हैं और B.Tech के बाद MDI Gurgaon से MBA किया है.
मेरे छोटे भाई किशोर जो Sr. Vice President हैं गुडगाँव के एक footwear export company में वो कल कानपूर पहुंचेंगे राखी के लिए. कितना मजबूत है ये बंधन जो खीच लता है दूर से भाई को.
मुंबई से देवरथ कुमार जी लिखते है:
(In 2015 ) मै अपनी बहन से राखी बंधवाने पुणे जा रहा हूँ. पिछले साल वो रांची में थी तो मै रांची गया था.
गुजरात से “राज ब्रह्मभट जी” लिखते हैं:
रक्षाबंधन का त्योहार आमतौर पर भाई-बहनों का त्योहार माना जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाईयों में राखी बांधकर उन्हें लंबी उम्र की दुआ देती हैं।
लेकिन रक्षाबंधन का एक बड़ा रहस्य यह है कि इस त्योहार की शुरूआत भाई-बहन ने नहीं बल्कि एक पति पत्नी के किया था। इसके बाद से संसार में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाने लगा। इस संदर्भ में जो कथा है उसका उल्लेख भविष्य पुराण में मिलता है। भविष्य पुराण के अनुसार एक बार दानवों ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। देवताओं की सेना दानवों से पराजित होने लगी। देवराज इंद्र की पत्नी देवताओं की लगातार हो रही हार से घबरा गयी और इंद्र के प्राणों रक्षा के उपाय सोचने लगी।
काफी सोच-विचार करने के बाद शचि ने तप करना शुरू किया। इससे एक रक्षासूत्र प्राप्त हुआ। शचि ने इस रक्षासूत्र को इंद्र की कलाई पर बांध दिया। इससे देवताओं की शक्ति बढ़ गयी और दानवों पर विजय पाने में सफल हुए। श्रावण पूर्णिमा के दिन शचि ने इंद्र को रक्षासूत्र बांधा था। इसलिए इस दिन से रक्षा बंधन का त्योहार बनाया जाने लगा। भविष्य पुराण के अनुसार यह जरूरी नहीं कि भाई-बहन अथवा पति-पति रक्षा बंधन का त्योहार मना सकते हैं।
दरअसल आप जिसकी भी रक्षा एवं उन्नति की इच्छा रखते हैं उसे रक्षा सूत्र यानी राखी बांध सकते हैं। इसलिए पुरोहित लोग आशीर्वादवाचन के साथ अपने यजमान की कलाई में राखी बांधा करते हैं।
बहन नहीं होने पर कई साली तक पत्नि ही राखी बाँधा करती थी बाद में बिटिया बाँधने लगी.
चेन्नई से किशोर राय जी लिखते है:
रक्षाबंधन उत्तर भारत का त्यौहार होने की वजह से यहाँ साउथ इंडिया में इस का ज्यादा प्रचालन नहीं है. पर अब काफी संख्या में उत्तर भारतियों और राजस्थान के लोगो की वजह से ये त्यौहार यहाँ भी प्रचलित हो गया है. अब यहाँ कई दूकानो और बाज़ार में राखी मिल जाती है.और अब यहाँ के लोग भी बहुत रूचि लेने लगे हैं. आने वाले समय में भाई बहन के प्रेम का प्रतीक ये त्यौहार यहाँ भी पुरे हर्ष और उल्लाश के साथ मनाया जायेगा.
करनाल से अश्वनी राय जी लिखते हैं:
राखी- इन दो शब्दों में कितनी आत्मीयता है, प्रेम है, विश्वास है और सबसे अधिक अपनापन है. मानों एक बहन अपने भाई की कलाई पर धागा बाँध कर उसे सुरक्षा कवच प्रदान कर रही हो! इसके बदले में भाई भी उसे उसकी रक्षा का भरोसा दिलाता है. ‘राखी’ शब्द का अर्थ है रक्षा करने वाला. इसे रक्षा बंधन भी कहा जाता है परन्तु इसमें ‘बंधन’ या ‘बाध्यता’ जैसी कोई बात नहीं है. राखी दो विभिन्न समुदाय के व्यक्तियों द्वारा भी बांधी जा सकती है. इसमें जाति व धर्म का कोई भेद नहीं है. इतिहास गवाह है कि हमारे देश में राखी का महत्व न केवल सामाजिक एवं सांस्कृतिक है बल्कि सामरिक दृष्टि से भी ऊंचा रहा है. यूं तो भारतवर्ष कई पर्वों एवं त्योहारों के लिए जाना जाता है परन्तु राखी हमारे देश की अनमोल सांस्कृतिक धरोहर की तरह आज भी बड़ी धूमधाम तथा उत्साह से मनाया जाता है. राखी बाँधने व बंधवाने के क्रम में आज बहुत से लोग यात्रा में व्यस्त होंगे. अतः इस पोस्ट को अधिक लंबा न करते हुए मैं सभी को इस पुनीत पर्व पर अपनी शुभकामनाएं देता हूँ. आप सबको रक्षा बंधन पर्व पर हमारी ओर से बधाई!
हरियाणा में राखी एक बड़ा त्यौहार है. इस दिन सभी महिलाये अपने भाइयों के यहाँ राखी बाँधने जाति हैं. इस दिन सभी महिलाओं को सरकारी बस में मुफ्त यात्रा की छुट दी जाति है.
(In 2015 ) दिल्ली से राजीव रंजन शर्मा जी लिखते है:
मेरी तीन बहने हैं. बड़ी बहन की शादी छपरा के ब्रह्मपुर में मिथिलेश शर्मा जी से हुई है जो रेलवे पोस्टल सर्विसेस में छपरा जंक्शन पर कार्यरत है. मेरी दूसरी और मेरे से छोटी बहन की शादी गोपालगंज में ही हुई है. उसके स्वसुर अधिवक्ता श्री रामदरश तिवारी जी है. मेरे बहनोई तिवारी जी के ज्येस्ट पुत्र अलकेश जी हैं जो अपने पिता के साथ वकालत के पेसे में है. सबसे छोटी बहन यही दिल्ली में रहती है और उसकी राजू शर्मा जी से हुई है जो मूलतः सिकरपुर के है नके पिता वन विभाग में थे. अब इनलोगों ने रामनगर में घर बना लिया है.
मुझे दोनों बहनों की राखी पोस्ट से प्राप्त हो गया है और छोटी बहन के यहाँ जा रहा हूँ राखी बंधवाने. मेरे बड़े भाई पंकज जी छपरा और गोपालगंज जायेंगे.