दादाजी, काश आज आपको कोई तोहफ़ा दे पाती: ईशा
ईशा गौरव/मुंबई
मेरे प्यारे दादाजी (Late SN Rana, Ex Principal, Dhanbad),
आपको कोटि-कोटि नमन…
जब भी घर आती हूँ,आपको महसूस करना चाहती हूँ,
देखकर आपके कपड़े, आपकी ऐनक, आपकी किताबें…फिर से आपकी यादों में खोना चाहती हूँ
कॉलेज से लौटने की बेला पे घर की बालकनी की ओर देखा करती थी
पता रहता था कि आप वहाँ बैठे होंगे, कुर्सी पर बैठकर अख़बारों को पलटते होंगे….मेरे गेट पे पहौंचते ही पूछेंगे “इशा…..कैसी थी आज कि क्लास?”
फिर आपके सामने वाली कुर्सी पर बैठकर ख़ुद को गौरवान्वित महसूस किया करती थी।
जबभि आप अपनी हजामत बनाते आपको चुपके से देखा करती थी….आपको ज़रा भी लग जाए तो दौड़कर मलहम देती थी।
अपनी जेबखर्ची से पैसे बचाकर आपके जन्मदिन पर तोहफ़ा लिया करती थी।
उसस छोटे से तोहफ़े को देते हुए आपकी आँखों से बरसती ख़ुशी से हर्षित होती थी।
मेरे जन्मदिन से एक दिन पहले आपके जन्मदिन का बेसब्री से ईंतज़ार रहता था…..सोचती थी ये कोई इत्तफ़ाक़ नहीं, मेरा आपसे नाता कुछ ज़्यादा ही गहरा था।
काश कि आज भी मैं आपको कोई तोहफ़ा दे पाती,
आपकी ख़ुशी,आपकी हँसी,आपकी आदतों को एक बार फिर अपनी नज़रों में भर पाती……
आपकी पौत्री:
ईशा गौरव/मुंबई
Mamta Bhatt: बहुत ही प्यारा अनुभव जिसे की तुमने अपनी दिलों से बया कि है !!! उनकी की आशीष तुम्हारे पूरे परिवार पर हमेशा बनी रहेगी !!!उनको मेरा शत् शत् नमनं