पहले समझते थे कि राजकुमार शुक्ल भूमिहार थे परंतु बाद में पता चला कि वे ब्रह्मभट्ट थे: संजय पासवान
पहली बार संस्थान ने साहित्य के क्षेत्र में स्व.भूपेंद्र अबोध (मरणोपरांत), पत्रकारिता के क्षेत्र में श्री नवेन्दु सिन्हा, कला क्षेत्र में पं. ललन महाराज (मरणोपरांत) एवं सामाजिक कार्य के क्षेत्र में स्व. शशिभूषण राय (मरणोपरांत) को सम्मानित करने का निर्णय लिया
राम सुंदर दसौंधी/PATNA

अन्य राज्यों यथा उत्तर प्रदेश से आदरणीय श्री लक्ष्मी नारायण आर.शर्मा, प्रियवर श्री आलोक शर्मा, गुजरात से श्री हर्षद ब्रह्मभट्ट, भोपाल से श्री महेंद्र प्रसाद शर्मा, दिल्ली से श्री रंजन कुमार एवं अन्य, छुट्टी लेकर भारतीय सेना में दूरस्थ प्रदेशों में पदस्थापित कुछ युवक इस समारोह में उपस्थित होकर इस अभूतपूर्व अवसर का साक्षी बने।
करीब सवा तीन बजे श्री विजय कुमार चौधरी, माननीय अध्यक्ष, बिहार विधानसभा सभा हौल में पधारे।उसके थोड़ी ही देर बाद श्री संजय पासवान, माननीय सदस्य बिहार विधान पर्षद एवं तत्पश्चात श्री सुशील कुमार मोदी, माननीय उपमुख्यमंत्री, बिहार पधारे।मंच पर स्थान ग्रहण करनेवालों मेंं उपर्युक्त महानुभावों के अतिरिक्त श्री प्रमोद कुमार सिंह, अवकाश प्राप्त विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, डाक्टर भीम राव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर, श्री लक्ष्मी नारायण आर.शर्मा एवं श्री राजेश भट्ट, संस्थान के अध्यक्ष थे।मंच संचालन सीमा चंद्रिका तिवारी कर रहीं थीं।दर्शकों में अच्छी संख्या में महिलाएं भी उपस्थित थीं।

पहली बार संस्थान ने साहित्य के क्षेत्र में स्व.भूपेंद्र अबोध (मरणोपरांत), पत्रकारिता के क्षेत्र में श्री नवेन्दु सिन्हा, कला क्षेत्र में पं. ललन महाराज (मरणोपरांत) एवं सामाजिक कार्य के क्षेत्र में स्व. शशिभूषण राय (मरणोपरांत) को सम्मानित करने का निर्णय लिया है। श्री राजेश भट्ट ने याद दिलाया कि गतवर्ष माननीय पर्यटन मंत्री, बिहार श्री प्रमोद कुमार ने घोषित किया था कि गांधी सर्किट के तर्ज पर पं. शुक्ल को स्थापित किया जाएगा, परंतु यह भी नहीं हो सका है।
पं.राज कुमार शुक्ल जयंती समारोह स्मारिका 2018 का विमोचन किया गया। यह स्मारिका चम्पारण सत्याग्रह के अग्रदूत पुण्यश्लोक पं. राज कुमार शुक्ल को समर्पित है। इस स्मारिका में भारत के महामहिम राष्ट्रपति की ओर से उनके निजी सचिव श्री विक्रम सिंह, श्री सत्यपाल मलिक, महामहिम राज्यपाल बिहार, श्री विजय कुमार चौधरी, माननीय अध्यक्ष, बिहार विधानसभा, श्री सुशील कुमार मोदी, माननीय उपमुख्यमंत्री, बिहार, श्री श्रवण कुमार, माननीय मंत्री, श्री मंगल पांडेय,माननीय मंत्री, श्री कृष्ण कुमार ऋषि, माननीय मंत्री, श्री अशोक चौधरी, माननीय सदस्य बिहार विधानसभा, श्री प्रमोद कुमार, माननीय मंत्री, श्री महेंद्र भट्ट, माननीय विधायक, उत्तराखंड के शुभकामना संदेशों के अतिरिक्त 10 रचनाओं को स्थान दिया गया है।

इसके लिए विशिष्ट अतिथि सम्मान श्री प्रमोद कुमार सिंह, अवकाश प्राप्त विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, डाक्टर भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर व श्री लक्ष्मी नारायण आर.शर्मा को प्रदान किया गया। इसके अलावा संस्थान के मधुबनी, दरभंगा, सहरसा, पटना, गोपालगंज ,भोजपुर,बेगूसराय और मुजफ्फरपुर जिले के पदाधिकारियों को जन प्रतिनिधि सम्मान से सम्मानित किया गया।
अपने संबोधन में डाक्टर संजय पासवान माननीय सदस्य बिहार विधान परिषद और पूर्व मंत्री, भारत सरकार ने बताया कि पहले तो वे समझते थे कि शुक्ल जी भूमिहार जाति के थे परंतु हाल में पता चला कि वे ब्रह्मभट्ट थे। अध्ययन से पता चला है कि निलहों के अत्याचार को सर्वप्रथम ब्रह्मभट्ट जाति के लोगों ने विरोध करना प्रारंभ किया।इसमें छह लोग मारे गए थे।बाद में अन्य जाति के लोग इसमें जुड़े। इन्होंने बताया कि श्री राजेश भट्ट द्वारा उठाए गए सभी मांगों का पूर्ण समर्थन करते हैं तथा सरकार से अनुरोध करते हैं कि इन्हें पूरा किया जाना चाहिए।
श्री लक्ष्मी नारायण आर.शर्मा ने अपने संबोधन उल्लेख किया कि श्री संजय पासवान का मंतव्य ने उन्हें रोमांचित कर दिया है।उन्होंने पं.राज कुमार शुक्ल और अंग्रेज अधिकारी ऐमन के संबंधों का उल्लेख किया।
श्री प्रमोद कुमार सिंह अवकाश प्राप्त विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग ने अपने संबोधन में कहा कि ब्रह्मभट्ट जाति के लोगों में बौद्धिक चेतना और जुझारूपन दोनों गुण एक साथ है। इस क्रम में उन्होंने ने चंदवरदाई और पृथ्वीराज प्रकरण का विस्तार से वर्णन किया।उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आन्दोलन की बुनियाद थे पं. राज कुमार शुक्ल। इतिहासकारों ने बुनियाद की उपेक्षा की है। इनको यथोचित सम्मान की दिया जाना चाहिए।
श्री सुशील कुमार मोदी, माननीय उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वे सोच रहे थे कि समारोह में सौ-पचास व्यक्ति होंगे परंतु यह देखकर प्रसन्नता हुई कि हौल खचाखच भरा हुआ है और लोग कार्यक्रम को बीच में छोड़ कर नहीं जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि शुक्ल ने मोहनदास को महात्मा बनाया।वे जीवटवाले व्यक्ति थे जिन्होंने गांधी को चम्पारण आने के लिए बाध्य कर दिया जिससे चंपारण सत्याग्रह आंदोलन की नींव पड़ी।उन्होंने अपनी सारी संपत्ति को बेच दिया फलस्वरूप उनकी मृत्यु पर लोगों ने चंदा कर उनका दाह-संस्कार किया।मृत्यु होने पर उनकी बेटी ने मुखाग्नि दी।100साल पहले यह उनके परिवार की प्रगतिशीलता और चेतना संपन्नता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उनके जन्मदिन और पुण्यतिथि पर राजकीय समारोह आयोजित करने हेतु विधानसभा में प्रश्न उठा है, जो सरकार के विचाराधीन है।इसकी घोषणा मुख्यमंत्री के स्तर से ही उचित होगा।अन्य मांगों के संबंध में संस्थान का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिले ताकि उस पर विचार कर कार्रवाई की जा सके।उन्होंने श्री राजेश भट्ट से आग्रह किया किया कि पं. शुक्ल की जयन्ती मनाने का सिलसिला रूकना नहीं चाहिए।
श्री विजय कुमार चौधरी, माननीय अध्यक्ष, बिहार विधानसभा ने अपने संबोधन में कहा कि ‘गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय।
बलिहारी शुक्ल जी आपको, जो गांधी दियो बुलाए।।’ उन्होंने आगे कहा कि गांधी हीरा थे तो शुक्ल जौहरी।साधारण किसान के असाधारण संकल्प ने आजादी की लड़ाई को नयी दिशा दी। उनको सम्मानित कर हम उनपर एहसान नहीं कर रहे हैं, यह उनका हक है। उन्होंने विधानसभा की लाइब्रेरी में शुक्ल जी का रंगीन चित्र लगवा दिया गया है।बिहार सरकार ने भारत रत्न देने की अनुशंसा कर दी है।
धन्यवाद ग्यापन श्री अजित कुमार नयन ने किया ।
समारोह संपन्न होने के पश्चात मैंने अपनी ओर राय प्रभाकर प्रसाद लिखित एवं नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित पुस्तक’राज कुमार शुक्ल’की एक प्रति आदरणीय श्री लक्ष्मी नारायण आर.शर्मा को भेंट किया।
कल पुराने म्यूजियम के सभागार में पूर्व सचिवालयकर्मी श्री कमलनयन श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पं.राज कुमार शुक्ल स्मारक न्यास की ओर समारोह पूर्वक पं.राज कुमार शुक्ल की 143वीं जयन्ती मनाए जाने की जानकारी मिली।इस समारोह की अध्यक्षता श्री रत्नेश्वर मिश्र, पूर्व विभागाध्यक्ष ने की।इसमें श्रीमती सीता साहू,महापौर पटना और डाक्टर दिलीप चौधरी माननीय विधान पार्षद के भाग लेने की सूचना है।इस समारोह में पं. शुक्ल की जयन्ती पर राजकीय समारोह आयोजित करने की मांग की गई।
कल ही पश्चिम चम्पारण जिला मुख्यालय बेतिया के पाराडाइज इंग्लिश स्कूल में पं.राज कुमार शुक्ल स्मारक समिति की ओर से श्री रवींद्र कुमार शर्मा की अध्यक्षता में पं.राज कुमार शुक्ल की 143वीं पुण्यतिथि मनाए जाने की सूचना मिली है।इस समारोह में पं. शुक्ल को भारत रत्न देने, बेतिया या चनपटिया रेलवे स्टेशन का नाम पं.शुक्ल के नाम पर करने,पंडित शुक्ल के नाम पर कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना करने और बेतिया में पं. शुक्ल की प्रतिमा स्थापित करने की मांग किए जाने का समाचार है।
अगामी पहली सितंबर को राज कुमार शुक्ल शोध संस्थान की ओर से श्रीकृष्ण पब्लिक स्कूल, जमशेदपुर के सभागार में पं.शुक्ल की 143वीं जयन्ती मनाए जाने के कार्यक्रम निर्धारित होने की सूचना है जिसमेंश्री सरयू राय, माननीय मंत्री, झारखंड सरकार मुख्य अतिथि होंगे।
इस प्रकार पं.राज कुमार शुक्ल की जयंती पर कार्यक्रमों का आयोजन के लिए समाज में उत्पन्न जागृति स्वागतयोग्य है।