समझौता करो, नजरअंदाज करो, जाने दो,अरे छोड़ो भी
यदि एक स्त्री किसी भी बात का विरोध नही कर रही ,तकलीफ होते हुए भी तो ये उसका प्यार है अगले के प्रति ,,,भावुकता में आंसू भरकर लम्बी सांस लेकर आंसुओ को सूखा लेती है तो ये अगले की जीत नही हार है ।
किरण शर्मा/मुंबई
#कब तक आखिर #कब तक हम झेले? कब तक चुप रहे कब तक न करे बखेड़ा,#और क्यों करे समझौता क्यो करे इग्नोर हम???
#कुछ पता नही ,बस शुभचिंतक सलाह देकर चले जाते है और मन को दुखी कर देते है😢
सुबह से शाम तक के अनवरत कामों को निपटाते हुए अगर ब्रेक ले ले या कुछ अपने मन का कर ले तो क्यो अखरता है लोगो को भाई ,#हम स्त्री है क्या इसीलिए बैल है,करते ही जाओ करते ही जाओ बस यही जन्दगी है।
#मानती हूं नारी को ईश्वर ने सहनशक्ति दी है,ममता दी है ,पर ये सब भी एक हद तक ना,ऐसा तो नही की हमारे किये हुए मेहनत है सुबह से शाम तक किये गए कामों पर कोई प्यार से तारीफ करके थकान पर थोड़ा ठंडक दे राहत दे,या बस कमी ही निकालने के लिए तैयार है सब😢
ये मन भी बहुत चंचल है अनन्त इच्छाएं रखता है ,पर एक तारीफ की यदि चाहता है मन मे तो क्या बुरा है ,कर दीजिए न थोड़ी सी तारीफ ,क्या चला जायेगा आपका,पर लोगो से वो भी नही होता😑

कितना अंतर है न एक स्त्री व एक पुरुष की सोच में,पुरुष भी जन्म ही तो लिए न एक स्त्री की तरह या #अवतार लिए है भगवान की तरह,शारीरिक रूप से एक नारी से ज्यादा ताकतवर है तो खुद को ईश्वर समझने लगे ये सब भूल के की उनको भी जन्म एक नारी ने ही दिया है😶
बड़ी बड़ी बातें करना ,फेसबुक व्हाट्सएप पर ज्ञान बांटना बड़ी तेजी से करते है लोग पर उन बड़ी बड़ी बातो को जीवन मे उतारने से कोसो दूर रहते है ।
यदि एक स्त्री किसी भी बात का विरोध नही कर रही ,तकलीफ होते हुए भी तो ये उसका प्यार है अगले के प्रति ,,,भावुकता में आंसू भरकर लम्बी सांस लेकर आंसुओ को सूखा लेती है तो ये अगले की जीत नही हार है ।
लोग बड़े फक्र से कहते है बेटा बेटी एक समान ,बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ,अरे इस बात को भी तो बढ़ावा दे #कि जो बेटी आपके घर आई है या आपके सम्पर्क में है उसको मान दे सम्मान दे ,या अब ये भी नारे लगाए जाएं तो समझ मे आएगा,अजीब स्थिति है एक नारी की 😶
बड़े बड़े पदों पर आसीन अधिकारियों को भी अक्सर देखा जाता है अपनी पत्नियों से बहुत गन्दे तरीके से गाली गलौच करके बात करते हुए,मन तो होता है बोल दे कि अरे जब आप अपनी अर्धागिनी को मान सम्मान नही दे सकते तो दूसरी स्त्रियों को क्या सम्मान देगे,सब लोग अपनी बकैती एक नारी पर ही दिखा कर खूद को गौरवान्वित महसूस करते है।
बेहद शर्म की बात है एक नारी —चारों तरफ पिजरा ,और नारे क्या लगाए जा रहे ,हमारे घर मे बेटा बेटी एक समान है,उनको उच्च शिक्षा देते है ,पर पत्नी की बात आते ही उन पुरुषों के जेहन में सिर्फ एक ही बात रहती है #पत्नी मतलब सब काम तरीके से करने वाली या नौकरों से करवाने वाली एक मशीन जिसके अंदर सिर्फ परिवार के प्रति कामो की लिस्ट फीड कर दिया गया है😑
कैसे दुखी कर सकते हो आप उसको जो आप पर आश्रित हौ,क्यो अहसास दिलाते हो कि वो कमजोर है ,क्यो नही आप उसकी ताकत बन जाते,सिर्फ दिखावे में नही रियल में भी ,,किसी की आंखों में आंसू लाकर कैसे कोई खुश रहता है ये सब बात मेरी समझ से परे है…
#ईश्वर की इस रचना और खूबसूरत उपहार का सम्मान करें, ताकत बने , हौसला बनें और खुद की नजरों में गर्व महसूस करें बिना किसी दिखावे के….
“नाजुक सा मन है भर जाता है ,
छोटी छोटी बातों से थक जाता है ,
नारी हू तो इसमे मेरी क्या गलती
ख्याल तो पूरा रखा ,फिर कमी क्या कर दी,
अपनी बेटी इतनी प्यारी जान लुटाते है,
फिर क्यो हमसे इतनी सख्ती से पेश आते है,
हम भी तो एक बाबुल के घर की बिटिया है,
सारा जीवन सेवा में ही झोंक दिया है…