फेसबुक का मेरा अनुभव: बिंदु
facebook से समझना आसान हो गया कि कौन Positive सोचवाला है और कौन Negative
चाहे जो भी हो एक बात तो पक्की है, facebook के आने से लोगों को समझना आसान हो गया है कि कौन Positive सोच वाला है और कौन Negative सोच रखता है। जिन महिलाओं का न मायका है ठीक से न ससुराल है, उन्हें एक बहुत बड़ा भरा पूरा परिवार दे दिया है facebook ने। अपनी ख़ुशी और गम यहाँ शेयर कर हमें अच्छा लगता है।
बिंदु कुमारी/नवी मुंबई
आप सबने मेरे लिखे सारे articles को बहुत सराहा है, इसके लिए आप सबों का धन्यवाद। और मुझे लिखने के लिए प्रेरित करने के लिए राय तपन भारती भैया का बहुत आभार।
इस बार मैं जो लिख रही हूँ वो कुछ हट कर है। यह किसी व्यक्ति विशेष की कहानी न होकर मेरे खुद का अनुभव है जो मैं आपलोगों के साथ बाँट रही हूँ। मैं कई हफ़्तों से इस विषय पर लिखना चाहती थी पर व्यस्त होने के कारण लिखने में देर हुई। अरे अरे ज्यादा मत सोचिये, मैं facebook की बात कर रही हूँ।
“वाह रे facebook तुमने कितने रूप दिखाए, तुमने कितनों के रूप दिखाए”
facebook के आने से एक सबसे अच्छी बात ये हुई की बहुत सारे लोग जीना सीख लिए। कुछ तो सचमुच में जीते हैं और बहुत सारे लोग facebook पर फोटो upload करने के चक्कर में अच्छी जिन्दगी जीने लगे।
ऐसे भी लोग हैं जो कभी अपना जन्मदिन नहीं मनाए,वो भी अपना Birthday मनाने लगे और नए कपड़े खरीदने लगे। बच्चों का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जाने लगा।
जिन Couples ने कभी अपनी Marriage Anniversary नहीं मनाई, वो भी मनाने लगे। भले पति पत्नी में भयन्कर युद्ध छिड़ा हो, पर केक बड़ी सी smile के साथ काटते हैं।
जो लोग कभी अपने माता पिता की इज्जत नहीं करते, वो भी Mothers’ Day और Fathers’
Day मनाने लगे। भले माँ बाप से कोई मतलब न हो, पर तस्वीर के साथ लम्बी चौड़ी प्रवचन upload करने से नहीं चूकते, जैसे श्रवण कुमार यदि कोई है तो सिर्फ और सिर्फ वही है।
ऐसी महिलाएँ जिसने कभी अपने सास ससुर की इज्जत नहीं की, अपने दरवाजे पर जिल्लत भरी जिन्दगी जीने को मजबूर किया हो, पर facebook पर ऐसा लिखेगी जैसे उससे बेहतर बहू तो कोई हो ही नहीं सकती।
कई लोग ऐसे भी होते हैं जो कम्बल ओढ़ कर घी पीते रहने में माहिर होते हैं। हमेशा सब के सामने अपनी आर्थिक स्थिति का रोना रोते रहते हैं। ऐसे फटेहाल गिरधारियों के सच्चाई के बारे में भी facebook ने हमे बताया जब वो रोमांटिक पर्यटन स्थलों की तस्वीर upload करते हैं।
मुझे ऐसे लोगों पर बहुत हँसी आती है जो facebook friend बनाने में बहुत आगे होते हैं। वो बस आपका friend बन कर आपकी जिन्दगी में क्या चल रहा है, परदे के पीछे से देखते रहते हैं। आप कितनी भी अच्छी पोस्ट डालो या कितनी भी अच्छी तस्वीर upload करो, उनपर कोई असर नहीं होगा। ऐसे लोगों का दिल इतना छोटा होता है की वो किसी की तारीफ़ में एक शब्द लिखना तो दूर, उनकी उँगलियाँ like button तक भी नहीं पहुँचती। ऐसे लोगों के असली रूप से भी facebook ने परिचय कराया।
Facebook पर जब हम कुछ शेयर करते हैं और जब आप उस पर कुछ comment करते हैं तो यकीन मानिए, थोड़ी देर के लिए ही सही, ख़ुशी जरूर मिलती है। पर कुछ लोग ये ख़ुशी बाँटने में भी कंजूसी करते हैं। कई तो यह कहने से भी नहीं चूकते की अरे क्या बताएँ, मेरे मोबाइल में नेटवर्क ही नहीं रहता है,इसलिए कुछ नहीं लिख पाते।
मैं अपना अनुभव आपलोगों से शेयर कर रही हूँ और मुझे पता है की आप में से कइयों ने भी ऐसा महसूस किया होगा।
चाहे जो भी हो एक बात तो पक्की है, facebook के आने से लोगों को समझना आसान हो गया है की कौन Positive सोच वाला है और कौन Negative सोच रखता है। जिन महिलाओं का न मायका है ठीक से न ससुराल है, उन्हें एक बहुत बड़ा भरा पूरा परिवार दे दिया है facebook ने। अपनी ख़ुशी और गम यहाँ शेयर कर हमें अच्छा लगता है। खुशियाँ दोगुनी हो जाती है और गम आधा हो जाता है।
Thank You Facebook तुमने मुझे बहुत ही अच्छे अच्छे लोगों से मिलाया जो अब जिन्दगी का हिस्सा बन चुके हैं। उम्मीद है आगे भी हमें facebook से खुशियाँ मिलती रहेंगी।
(लेखिका आयकर अधिकारी देवरथ की पत्नी हैं)
Comments on FB group:

Sharma Nirmala एक सच जो सामने रखा अच्छा लगा ।आज फेस बुक से पूरी दुनिया से जूर गए हम सब ।एक के सुख दुख जान पाते है।धन्यवाद आपको तथा फेस बुक को।
Kailash Sharma आपके विचार बहुत ही महत्वपूर्ण हैँ। जी हां आपने सच कहा कि social media के इस माध्यम ने अनेक लोगों को अपने विचार को अभिव्यक्ति देने का मंच प्रदान किया है । इस मंच का हम सब को भरपूर लाभ उठाना चाहिए, किसी के अच्छे विचारों की हमें प्रशंसा करने में कंजूसी नहीँ करनी चाहिए साथ ही यदि कही हम किसी से असहमत हैं तो अपने विचार बहुत संयमित और परिमार्जित ढंग से रखने चाहिए ।

Niraj Bhatt बिंदू भाभीजी का जवाब नहीं मैं तो आपको जानता कि आप सिर्फ नृत्य कला में परांगत हैं पर आज आपकी लेखनी का दिवाना हो गया।
Shashikant L Sharma Facebook ने हर एक के लिए कुछ न कुछ अच्छा किया है ! हमे तो हमारे बचपन के दोस्त से मिलाया ! जय हो फेसबुक बाबा की
Rashmi Rekha बिलकुल सही लिखा आपने ..ज़ो लोग अपने खास दिंन को नहीं मनाते थे वो भी फेसबुक पर पोस्ट करने के लिये मनाने लगे अच्छा पहनने लगे ..सज धज कर रहने लगे …सच जीना सिखा दिया
Gunjan S. Tripathi सरल शब्दो में फेसबुक की महिमा का वर्णन किया है और लोगो के दोहरे चरित्र का जो वर्णन किया है आपने ,वाकई प्रशंसा की पात्र है आप….. बहुत खूब….
Priyanka Roy: बढ़िया नपा तुला अनुभव है आपका बिंदु दी। फेसबुक पर लोगों के सकरात्मक व् नकरात्मक पहलुओं पर गूढ़ विचार हैं आपके। शायद ऐसी ही सोच कई लोगों की दूसरों के लिये बनती भी है। सभी एक दूसरे से जुड़ रहे हैं मिल रहे हैं। ये फेसबुक की अनोखी सौगात है। सभी इसके अच्छे पहलु को समझे और एक पॉजिटिव वेब में खुशियों को साझा कर उन्हें नए पंख दें। मुझे फेसबुक पर सकरात्मक लोगों का साथ हमेशा प्यारा लगा है।
Gyan Jyoti Bhatt फेसबुक के चलते ही हमे आप जैसे अनेको के साथ मिलवाया है , अन्याथा आपलोग मुम्बई मे हमलोग पटना मे , कभी भी जान पहचान नही हो पlती ना तो goodmorning होती ना तो गुड नाईट होती . ओर तो ओर Nice भी नही होती किसी अच्छी फोटो पर .आपको इस लेख के लिये बहुत बहुत तहेदिल से धन्यवाद ओर अंत मे THANK YOU FACE BOOK