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मंथन: समाज तेजी से आगे बढ़ने के लिए करवट ले रहा-देवरथ Delhi India 

मंथन: समाज तेजी से आगे बढ़ने के लिए करवट ले रहा-देवरथ

मंथन में शामिल सब लोग एक समान, कोई भेदभाव नहीं, एक पारिवारिक माहौल, जिसमें न कोई बड़ा न कोई छोटा, न कोई मंच, न कोई मुख्य अतिथि,न कोई फूल माला। क्या बड़े अधिकारी, क्या नेता, क्या व्यवसाई, क्या उद्यमी, क्या किसान, क्या गृहिणी, क्या विद्यार्थी, क्या नौकरीपेशा, क्या वकील, क्या सीए, क्या पुरुष , क्या महिला-मंथन में सभी एक दूसरे के साथ बैठते हैं, आपस में घुलते-मिलते हैं, जिससे सबों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

देवरथ कुमार/एडमिन, Brahmbhattworld
नई दिल्ली: सबसे पहले मंथन में भाग लेने वाले सभी लोगों का हृदय से धन्यवाद और आभार। आप सब दूर-दूर से मंथन में शामिल होने सपरिवार आए, यह आप सबों की अपने समाज के प्रति प्रेम का प्रतीक है जो आप खिंचे चले आये। साथ ही उन हजारों शुभचिन्तकों का धन्यवाद जिन्होंने मंथन को वैचारिक समर्थन दिया। घर बैठे लाइव के जरिये मंथन को देखने और सराहने वालों का भी धन्यवाद, जिन्होंने अपना समय समाज के कार्यक्रम को दिया। उन मुट्ठी भर लोग का भी धन्यवाद, जिन्होंने लगातार मंथन के विरुद्ध षड्यंत्र और प्रपंच रचा, जिनकी वज़ह से हमारी इच्छा शक्ति और दृढ़ हुई।
मंथन से लौटकर इसमें शामिल हुए लोग जिस तरह से लगातार अपने अनुभव लिख रहे हैं, उससे मन को संतोष हो रहा है कि हम समाज मे जागरूकता पैदा करने के जिस उद्देश्य को लेकर चले थे, वह सही दिशा में जा रहा है। और लोग भी अपने अनुभव लिखेंगे, ऐसी आशा है।
 
पिछले 5 सालों से ब्रह्मभट्टवर्ल्ड का एडमिन होने के नाते अपने समाज़ को करीब से देखा और समझा है। कई तरह के खट्टे मीठे अनुभव हुए। हमारी टीम की लड़ाई अपने समाज के विकास में बाधक नकारात्मकता और हीनभावना से है। ब्रह्मभट्टवर्ल्ड का मंथन इन बुराइयों पर विजय पाने का एक जबरदस्त जरिया है। मंथन हमें यह अहसास दिलाता है कि अब अपना समाज तेजी से आगे बढ़ने के लिए करवट ले रहा है। हमारा युवावर्ग हमारी ओर मार्गदर्शन के लिए उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है।
 
मंथन में शामिल सब लोग एक समान, कोई भेदभाव नहीं, एक पारिवारिक माहौल, जिसमे न कोई बड़ा न कोई छोटा, न कोई मंच, न कोई मुख्य अतिथि,न कोई फूल माला। क्या बड़े अधिकारी, क्या नेता, क्या व्यवसाई, क्या उद्यमी, क्या किसान, क्या गृहिणी, क्या विद्यार्थी, क्या नौकरीपेशा, क्या वकील, क्या चार्टर्ड अकाउंटेंट, क्या पुरुष , क्या महिला-मंथन में सभी एक दूसरे के साथ बैठते हैं, आपस मे घुलते मिलते हैं, जिससे सबों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। फेसबुक के जरिये एक दूसरे को देखे व्यक्ति जब पहली बार मंथन में आमने सामने होते हैं, तो जो आनंद मिलता है, उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है, मंथन में शामिल लोग मुझसे जरूर इत्तेफाक रखेंगे। मंथन हर उम्र के लोगों में एक नई ऊर्जा पैदा कर रहा है, नित्य नए रिश्ते बना रहा है। ब्रह्मभट्टवर्ल्ड मंथन में मिले अनगिनत लोगों में आत्मीय सम्बन्ध बन रहे हैं।
जो लोग Brahmbhattworld की नीतियों को और पोस्ट को पिछले कुछ सालों से follow कर रहे हैं, उन्हें यह पता है कि हमारी टीम युवा पीढ़ी को समाज से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत रहा है। दिल्ली मंथन में युवाओं की भागीदारी और मंथन के आयोजन में युवाओं का सक्रिय योगदान देखकर मन को तसल्ली हुई। यकीन मानिए, हममें से कई खुद तो समाज से जुड़े रहे, पर अपने बच्चों को समाज से दूर रखा, दिल्ली मंथन उन सबों के लिए एक संदेश है कि हमारी अगली पीढ़ी अपने लोगों से मिलकर ख़ुश होती है, अपने बच्चों को समाज से जोड़िए। ब्रह्मभट्टवर्ल्ड युवाओं की बात सुनता है और उन्हें अपने विचार रखने की पूर्ण आजादी देता है।
True Leaders are Those who Develop Leadership in Others. हमारी टीम युवाओं में नेतृत्व क्षमता को विकसित करती है। हम खुद नेपथ्य में रहकर युवाओं को आगे लाते हैं, उनके किये काम की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हैं, उनका हौसला और आत्मविश्वास बढ़ाते हैं। दिल्ली मंथन के दौरान आपने भी इसे महसूस किया होगा। हमारा स्पष्ट मानना है कि यदि समाज का भविष्य बनाना है तो वर्तमान को ही ठीक करना होगा, हमारा फोकस आज के बच्चे हैं। हम कब तक अपने पूर्वजों की बातें करते रहेंगे, उनका सम्मान दिल मे है, पर समाज को आगे ले जाना है तो नई पीढ़ी को ही सशक्त करना होगा।
 
युवा सत्र में हमने युवाओं का interaction अपने समाज के ही Sr.IPS officer, IRTS officers, Retd. Vice Chancellor, Renowned Agriculturist और Director of UPSC Coaching Institute से कराया जिससे बच्चे inspire हों, उनका हौसला बढ़े। इस दौरान जब एक 20 साल के युवक ने पैनल के लोगों से पूछा कि मुझे IAS बनना चाहिए या मोटी तनख्वाह देने वाली किसी Private firm में जाना चाहिए? एक ने पूछा कि उनकी खेती की जमीन है उससे वो किस तरह ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। तब हमें असीम संतोष हुआ कि मंथन की सार्थकता सिद्ध हो रही है, हमारे बच्चे समाज के अंदर Role Model को देख रहे हैं, जिससे उनका हौसला बढ़ रहा है।
 
मंथन ने बताया कि हरियाणा के अपने स्वजन कितने समृद्ध और खुले विचारों के हैं। मंथन में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बदलते समाज का प्रतिबिंब है और बहुत बड़ा संदेश देती है। कार्यक्रम की शुरुआत में सरस्वती वंदना हो या अंत मे संगीत संध्या, मंच संचालन हो या सामाजिक मुद्दों पर विचार रखना, मंथन हर सत्र में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करता है। मंथन आयोजन समिति के सदस्यों की निःस्वार्थ योगदान से समाज मे टीम भावना का संचार हो रहा है। मंथन हर तरह की प्रतिभाओं से समाज को रूबरू कराने का माध्यम है
 
मंथन कठिन संघर्ष से सफ़ल हुए लोगों को सम्मानित कर एक तरफ जहाँ उनके जज्बे को सलाम करता है वहीं दूसरी ओर लोगों को उनके संघर्ष से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का संदेश भी देता है। मंथन अपने समाज के उत्थान के लिए कार्य करने वालों का सम्मान करने के साथ साथ बुजुर्गों का आदर करना नहीं भूलता। मैंने अपने लाइव में भी कहा था और आज दुहराता हूँ कि मंथन एक पारिवारिक उत्सव है जहाँ हम सब इकट्ठे होकर खुशियाँ मनाते हैं, एक दूसरे का मनोबल बढाते हैं। आप यकीन मानिए, मंथन से जब आप अपने घरों में लौटे होंगे तो आपको Sense of Belongingness का अहसास जरूर हो रहा होगा, मंथन आपको सम्बल देता है, आपके सोच का दायरा विस्तृत करता है। मंथन हमारे अंदर आत्मविश्वास पैदा करता है, हम दो हमारे दो से आगे की विस्तारित परिवार की दुनिया से हमारा परिचय कराता है।हमे मालूम है मंथन में शामिल होकर लौटे लोग एक वृहद परिवार मिलने की खुशी मना रहे हैं, अनेक नए लोगों से फोन और मैसेज के जरिये आपके सम्बन्ध विकसित हो रहे हैं।
 
ब्रह्मभट्टवर्ल्ड मंथन और हमारी टीम में भरोसा जताने साथ ही इतना प्यार देने के लिए आप सबों का एक बार फिर दिल से आभार।

Comments on facebook: 

Rakesh Sharma मंथन का बहुत अच्छा विश्लेषण।मंथन की याद दिल से निकाले नहीं निकलती है।जब जब स्वजनों की याद और मित्रों की याद आती है दिल भर जाता है।दुनिया का एक यह नयाब प्रयोग है जब आभासी दुनिया के मित्र जो एक दुसरे से केवल फेसबुक पर मिले होते हैं जब सामने से मिलते हैं तो जिस आनंद की अनुभूति होती है उसका वर्णन किन शब्दों में किया जाय, कहना मुश्किल है और यह बिल्कुल ही दिल का मामला होता है जो दिल को छू जाता है।
Rajeeb Kumar Roy: अद्भुत लेखनी, कौन कहेगा आप income टैक्स वाले हो मुंशी प्रेमचंद की आत्मा नहीं???? हमारी पहचान भी BBW की ही देन है कई लोगों से तो ऐसे संबंध बने हैं जो सगों से भी बढ़ कर है. क्या भारत क्या America क्या अफ्रीका मैं तो हर देश मे अपनो को मिल चुका इस BBW की बदौलत
शम्भू कुमार ब्रह्मभट्ट: मंथन से स्वजातीय जगत् में विशाल पैमाने पर आच्छादित ऊर्जा स्वयं दिखती तो नहीं, पर सबके मानस -पटल पर सकारात्मक विचारों का सूक्ष्म व सामयिक विस्फोट से ज़िन्दगी को स्वाभिमानी अन्दाज़ में जीने की अद्भुत प्रेरणा देती है।
Priyanka Roy बहुत उम्दा विश्लेषण, यथार्थ को जोड़ता। विशेषकर युवा सत्र की सफलता हमारे प्रयास की जीत है।ये समाज युहीं प्रेम सद्भाव से बढ़ता रहे इसपर भी नेक विचार।
Pankaj Kumar Maharaj अद्भुत विशलेषण देवरथ जी वाकई अतिसुंदर प्रस्तुति विस्तृत परिवार का एकमात्र मंच ** मंथन ** के जरिये स्वजनों एवं परिजनों के आधारभूत है, यहीं कारण है की बहृमभट्ट वर्ल्ड की प्रत्येक बन्धुओं का अपने स्वजनों के प्रति समर्पित होना ही इतनी बडी संख्या का होना “मंथन” का सफल होना निश्चित हुआ वैसे संपूर्ण आयोजक मंडल व समस्त प्रबुद्ध सहयोगी को हमारी और से धन्यवाद।
Ganpati Maharaj बहुत उत्कृष्ट वर्णन किया है आपने। अन्तर्मन से निकले एक एक शब्द,जहाँ कोई बनावट नही है।बहुत बहुत धन्यबाद आप सभी का,समाज को एकरूपता में लाने के निरंतर प्रयास हेतु।
Roy Tapan Bharati जब लेख या विश्लेषण दिल से लिखा जाय तो ऐसी ही जज्बाती पंक्तियाँ उभरेंगी। अनुज Deorath Kumar ने सही आकलन किया है कि इस मंथन ने युवाओं को समाज के करीब लाया और समाज ने भी युवाओं की प्रतिभा को समझा। BBW बुजुर्गों से अधिक युवाओं को आगे लाने में विश्वास करता है।
Ram Sundar Dasaundhi उत्कृष्ट विश्लेषण।समाज के सभी वर्गों के लिए उपयोगी आयोजन था मंथन
Sangita Roy देवरथ जी आपने मंथन का सटीक एवं विस्तृत वर्णन किया है। हर पंक्ति सच्चाई से रूबरू कराती है।अब यह हमपर निर्भर करता है कि हम क्या सोचते है। सच्चेदिल से आत्ममंथन करे तो सार्थकता जरूर नजर आयेगी ।हालांकि मैं मंथन मे शरीक नहीं हुई हूँ पर जितना सुना ,पढ़ा,लाइव देखा अच्छा लगा।
Sameer Sharma बहुत सुंदर लेख । तरह-तरह के अनुभव तो हम सबने भी बहुत कुछ किए होंगे मंथन मे आकर ,परंतु जिस सफ़ाई और सम्पूर्णता के साथ Deorath जी ने पूरे मंथन को अपने शब्दों में पिरोया है वो लाजवाब है । गागर में सागर।
Abhishek Kumar आप हमारे समाज को लगातार नयी दिशा प्रदान कर रहे है, आपके जजबे को मै सलाम करता हु

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