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मंथन ने मुझे व नेहा को जुडने का मौका दिया: अभिषेक Delhi India 

मंथन ने मुझे व नेहा को जुडने का मौका दिया: अभिषेक

मैंने ये देखा है कि brahmbhatt world में महिलाओं को काफी सम्मान दिया जाता है और उन्हे भी खुला मंच प्रदान किया जाता है।

अभिषेक कुमार/ New Delhi
मंथन के सभी स्वजनों को मेरा प्रणाम और छोटो को प्यार। मैं किसी भी व्यक्तिविशेष का नाम नहीं लेना चाहता, पर मेरे लिये वे लोग जिन्होने मंथन को सफल बनाने मे योगदान दिया है, उनका मैं तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूँ। जिन्होने अपने समाज के इतने सारे स्वजनों से मिलने का हमें सौभाग्य प्रदान किया है। क्योंकि आजकल इतनी व्यस्त जिंदगी हो रही है कि लोग एक शहर में रह के भी अपने अपने सगे संबंधियों से भी नहीं मिल पाते हैं और इस मंथन ने हमें इतने बड़े परिवार का हिस्सा बना दिया और अलग अलग राज्यों से आए अतिथी से मिलने का सुख प्रदान किया।
बेशक ना मैं facebook पर ज्यादा किसीसे बात करता हूं और ना ही पोस्ट करता हूं लेकिन जिन लोगों से भी मेरा सान्निध्य हुआ है सभी लोग मेरे हृदय में एक विशेष स्थान रखते हैं।
 
मंथन के बाद बहुत सारे स्वजनों से बातें और मुलाक़ातें हो ही रही हैं। इस बीच बहुत सारी अच्छाई और बुराई की बातें भी सामने आई पर हमारी मंशा बिल्कुल साफ होनी चाहिए कि हमसे गलती से भी किसी के साथ गलत ना हो।
इन्सान हूं मैं ए भगवान
गलती कर सकता हूं लेकिन
किसी का गलत नहीं।।
मैने ये देखा है कि brahmbhatt world में महिलाओं को काफी सम्मान दिया जाता है और उन्हे भी खुला मंच प्रदान किया जाता है। महिलाओं का जीवन भी त्याग और बलिदान से भरा है ये त्याग की भावना उस समय नज़र आती है जब वो मातृ रूप में प्रवेश करती है और शिशु के जन्म के बाद वे अपनी सारी पीडा को भूल जाती है। उनका सारा लालन पालन तो अपने माता पिता के घर होता है और वे शादी के बाद एक अनजान के साथ पूरी जिन्दगी समर्पित कर देती है और उसीकी बनकर रह जाती है।
मुझे तब बहुत पीड़ा होती है जब कुछ भी उनके साथ गलत होते देखता हूँ इसलिये मंथन के माध्यम से मैं ये कहना चाहता हूं कि हमारे समाज में नारी का विशेष स्थान हो। ऐसा कहने और सोचने के पीछे मेरे पास कई कारण हैं जो मैं लिखकर नहीं बयां कर सकता। क्योंकि हो सकता है कई लोग मुझसे सहमत ना हो।
आप सबने मेरी पत्नी नेहा को जो प्यार और सम्मान दिया उसके लिए मैं आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूँ। नेहा के बारे में मैं इतना कह सकता हूँ कि ये दिल की बहुत अच्छी है और जितना इनके चेहरे पे मुस्कुराहट होती है उतनी ही ये भावुक भी हैं। हम दोनो मिलकर समाज के लिये जितना कर सकते हैं उतना करने के लिये सदैव तत्पर रहेंगे।और मैं सदैव नेहा के साथ खड़ा रहूंगा। मैं चाहता हूँ हमारा समाज इतना सुदृढ़ हो जाए कि हमारे देश ही नहीं पूरे संसार को भी हमारे जाति पर गर्व हो। मै मंथन के लिये कुछ पंक्ति कहना चाहता हु :-
कुछ यूं कैद हुई जिंदगी मंथन से रिश्तों में
कि अब ना होता सवेरा ना ही शाम ढलती है।
सिमट गए हैं जज्बात चंद अल्फाज़ों में
हवा को भी अब अल्फाज़ों की कमी खलती है।
Comments on facebook: 
Pankaj Kumar Maharaj संपूर्णता से दिल की बातें, संप्रेषित करने की अद्भुत कला। अभिषेक जी को हार्दिक शुभकामनाएं और नव बर्ष 2019 की बधाई
Deorath Kumar मंथन से निकला एक और लेखक
बहुत अच्छा लिखा आपने
Rewti Choudhary बहुत ही सुन्दर और सरस विवेचन।आप दोनो की जोडी को शुभाशीष।
Mousam Maharaj महिलाओं के लिए आपकी सोच जानकर बहुत अच्छा लगा। आप खुद भी बहुत अच्छे हैं 💯। आप दोनों के साथ पिछे मैं भी खड़ी हुं
Pushp Kumar Maharaj नव वर्ष की बहुत बहुत बधाई और मंगलकामनाएं । स्वस्थ रहें , प्रसन्न रहें और जो ज़िन्दगी मिली है , उसे भरपूर जी लें।
Rakesh Sharma आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।बधाई।आपका पुरा परिवार सूखी वो प्रशन्न रहे।आपने बहुत अच्छी पोस्ट लिखी है जिसकी शब्दों में व्याख्या नहीं की जा सकती है केवल अनुभव की जा सकती है।बहुत बहुत धन्यवाद।
Neha Kumar आप सबों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। मेरे पति ने मेरा शुरु से ही बहुत साथ दिया है और अपनी जिंदगी जीने की पूरी आज़ादी भी दी है। उन्होने मेरे लिए जो भी सम्मानजनक बातें लिखी हैं उसके लिए मैं उनको धन्यवाद करती हूं। और आप सभी को भी धन्यवाद देती हूं की आपने उनके लेख को पसंद किया।उन्होने पहली बार लिखा है और ये सिर्फ bbw की देन है।
Rajeev Sharma मैं एक बार पुनः ब्रह्मभट्ट वर्ल्ड, दिल्ली मंथन के सारे एडमिन व आयोजन समिति के सारे सदस्यों और खासकर श्री राय तपन भारती जी व हमारे अध्यक्ष महोदय श्री एस एन भट्ट जी का दिल से शुक्र गुजार हुं जिन्होंने हमारे समाज के युवा पिढी़ को एक नया मंच दिया। जिस माध्यम से समाज में एक नयी पहचान मिली। और उनकी योग्यता समाज के सामने आयी। पुनः मै नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ सभी का आभार व्यक्त करता हुं।

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