गोरखपुर: छोटा शहर…योगी जी का शहर
Pushp Kumar Maharaj/Gorakhpur

शहर अपना सबको अच्छा लगता है जो जहां लम्बे अर्से से रह रहा हो , मुझे भी अपना शहर गोरखपुर धरती के खुबसूरत शहरों में एक लगता है… प्रसिद्ध नाथ संप्रदाय गोरखनाथ पीठ व गोरखनाथ मंदिर के नाम पर बसा गोरखपुर……
छोटा शहर घनी आबादी…योगी जी का शहर.. बिहार व नेपाल से लगा ,राप्ती नदी के किनारे बसा अपना गोरखपुर…… ठंड में खुब ठंडी और गर्मी में लू चलती प्रंचड गर्मी …….. यहां से थोड़ी दूर वह प्रसिद्ध स्थान जहां बुद्ध सो रहे हैं
जी हां कुशीनगर… जहां आकर बुद्ध ने अन्तिम सांस ली थी… और गोरखपुर के निकट वो स्थान जहां से बुद्ध ने पहली बार सांस ली थी यानि जन्म लिया था नेपाल में स्थित लुंबिनी जाने के लिए आपको गोरखपुर पधारना ही पड़ेगा……
गोरखपुर का एक ऐसा छापाखाना जिसकी पुस्तकें हर घरों में हर मंदिरों में मिलेगीं आप पूर्णतः परिचित होंगे.…..जी हां मैं गीता प्रेस की बात कर रहा हूं वो एक इकलौता प्रेस सिर्फ़ हमारे शहर गोरखपुर में ही है…
वैसे तो और कई स्थल है यहां घूमने के लिए जैसे गीता वाटिका , रामगढ़ ताल, विश्व का सबसे लंबा रेलवे स्टेशन,तारा मंडल, मुख्य बाजार गोलघर, गोरखपुर विश्वविद्यालय, कबीर स्थली मगहर (गोरखपुर से नज़दीक संत कबीर नगर में) वगैरह-वगैरह…..
मेरा बचपन यहीं बीता है स्कुली व कालेज की शिक्षा तक……मुझे गर्व है अपने फिराक गोरखपुरी के शहर में..
आम की शुरुआत गौडजीत नामक किस्म से शुरू होती है
उसकी मिठास व गंध आपको प्रेरित करेगा कि मैं गोरखपुर में पैदा क्यों न हुआ……..
जोगी जी इस शहर को सजाने संवारने में लगे हुए हैं उम्मीद है आने वाले दिनों में आप अपनी शामें गुजारने एक बार गोरखपुर आने का मन बना ही लें…..

सफल तो वो है जो ढल गया हर परिवेश में
मौसमी हवाओं के साथ, हर गति हर वेश में
कभी तो घूमेंगे ये काल चक्र
कब तक हमें ये सतायेगी…..
वो सुबहा कभी तो आयेगी……
वो सुबहा कभी तो आयेगी.…..