छठ की धूम मुंबई-चेन्नई से मुजफ्फरपुर तक हर जगह…
लोक आस्था के महापर्व छठ के तीसरे दिन आज अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया गया। छठ व्रतियों ने भगवान भाष्कर को नदियों, तालाबों सहित अपने घरों में भी अर्घ्य दिया। सोमवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ महापर्व संपन्न हो जाएगा।
चेन्नई, गाजियाबाद, रांची, गोरखपुर से लेकर कोलकाता में भी सूर्य भगवान की उपासना
राय तपन भारती एवं टीम

बंगलोर में रंजना राय छठ का टोकरा लेकर।

सुबह नींद खुली तो इन बॉक्स में एक SMS देखा- Happy छठ। अच्छा लगा। सच कहूं तो दीपावली पर भी ना जाने कितने मैसेज आये थे, लेकिन उतनी खुशी नहीं हुई थी, जितना आज छठ का मैसेज देखकर। खुशी इसलिए कि मैसेज भेजने वाला ना तो बिहार से था और ना हीं पूर्वांचल से । मैसेज से साफ था कि वो कोई खानापूर्ति भर नहीं था।
मैसेज में एक अपनापन था पर्व को लेकर और पर्व से जुड़े लोगों से अपनत्व का अहसास भी झलक रहा था। हड़बड़ी में था इसलिए आदतन छोटा सा जवाब भेजा-Thanx ….लेकिन मन गदगद था, यह सोचकर कि छठ की महत्ता बढ़ रही है। बिहार से बाहर के लोग भी इस पर्व की पवित्रता को अब समझने लगे हैं । बिहार और पूर्वांचल के सभी लोगों के साथ उन सभी को भी छठ पर्व की ढेर सारी शुभकामनाएं जो इस पर्व की महत्ता समझते हैं।

लोक आस्था के महापर्व छठ के तीसरे दिन आज अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया गया। छठ व्रतियों ने भगवान भाष्कर को नदियों, तालाबों सहित अपने घरों में भी अर्घ्य दिया। सोमवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ महापर्व संपन्न हो जाएगा।
पटना के गंगा तट से लेकर चेन्नई-मुंबई के समुद्र तट तक आज अर्घ्य देने के लिए लोगों की भीड़ रही। छठ का अद्भुत नजारा देखने को मिला।

जैसे-जैसे अर्घ्य देने का वक्त का नजदीक आ रहा था व्रतियों की कतारें बढ़ती जा रही थीं। भगवान सूर्य के अस्ताचल में जाने के बाद श्रद्धालुओं ने अर्घ्य दिया और अपने के घर की ओर लौट गए तेो वहीं कुछ श्रद्धालु नदियों के तट पर रात बिताने के बाद सुबह अर्घ्य देकर लौटेंगे।

मुंबई से आयकर अधिकारी देनरथ कुमार लिखते हैं कि अपने मित्र जयपुरियार जी के यहाँ संध्या अर्ध्य में शामिल होने का सौभाग्य मिला। आपका बहुत बहुत आभार Nawanit Jaipuriar जी। ‘उगते सूरज की पूजा’ तो संसार का विधान है, पर केवल और केवल हम ‘भारतवासी’ अस्ताचल सूर्य की भी अराधना करते हैं, और वो भी, उगते सूर्य से पहले। अगर ‘उदय’ का ‘अस्त’ भौगोलिक नियम है, तो ‘अस्त’ का ‘उदय’ प्राकृतिक और आध्यात्मिक सत्य।
खारघर्, नवी मुंबई से रुपेश कुमार् लिखते हैं, हालांकि कुछ कारणों से हमारे घर इस बार छठ पूजा नहीं हो पा रही हैं। फिर भी घाट पर जा कर अन्य व्रतियों के साथ इस उत्सव में शामिल हुआ।


बंगलोर, पटना, मुजफ्फरपुर, डेहरी आन सोन, गोरखपुर में कुछ लोग पैदल ही नदी तट पर गए तो कुछ लोग गाड़ी से निकले। सड़कों पर काफी भीड़ रही। गाड़ी के लिए पार्किंग करने की जगह-जगह व्यवस्था की गई है, जहां गाड़ियां खड़ी कर लोग पैदल गंगा तट जा सकते हैं। जो नदी या समुद्र तट पर नहीं गए उन्होंने अपने घर या अपार्टमेट की छतों पर सूर्य देता को अर्ध्य दिया।


पटना में घाटों पर अभूतपूर्व सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। खगड़िया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया, बेगूसराय, दरभंगा सहित बिहार के सभी जिलों में अर्घ्य देने के लिए आस्था का सैलाब उमड़ा। हर नदी के किनारे छठ के अर्घ्य के लिए लोग इकट्ठा हुए। छठ के घाटों को रंग-बिरंगे बल्बों से सजाया गया है। घाट पर छठ के गीत बज रहे हैं। पूरा माहौल छठमय हो गया है।