क्या बेटियों को प्रॉपर्टी में हक नहीं देना चाहिए?
बेटों को करोड़ों की प्रॉपर्टी पर बेटी को शादी तक ही उपहार क्यों, बाद में भी क्यों नहीं
बेटी को राशि या प्रॉपर्टी में से हिस्सा वसीयतनाामा के जरिए लिख देंगे तो मौत के बाद विवाद नहीं होगा
लेखक : राय तपन भारती, पत्रकार, दिल्ली

-हमने इस ग्रुप के जरिए दहेज के खिलाफ एक बड़ी जंग छेड़ रखी है। हम दहेज की बड़ी रकम और बड़ी बारात की शर्त के एकदम खिलाफ हैं। पर इसका यह मतलब नहीं कि माता-पिता बेटी को कुछ भी न दें।
-आगे कुछ कहने के पहले मुंबई की एक सत्यकथा सुन लीजिए। वहां अपने समाज के एक सज्जन व्यापार में बहुत तरक्की कर गए। कारोबार में इतनी व्यस्तता कि एक बार उनसे मिल गया तो दुकान पर ही आमंत्रित किया। घर पर मिलने की फुर्सत नहीं। वहीं दूध पिलाया। बातचीत से पता लगा कि उनके पास पैसे और प्रॉपर्टी भरपूर है। बाद में उन्होंने झारखंड में कार्यरत नौजवान से शादी की। इस विवाह को 15-20 साल हो गए। पर बेटी को अपनी प्रॉपर्टी में से अब तक कुछ भी नहीं दिया।
-पर उसी महानगर में सरकारी नौकरी के अलावा अपना कारोबार करने वाले एक स्वजन ने अपनी बेटी को शादी के कुछ साल बाद मुंबई में ही अपने अपार्टमेंट के बगल में एक फ्लैट खरीदकर दे दिया। संयोग देखिए कि उस बेटी के पति का युवावस्था में ही निधन हो गया। पिता से फ्लैट मिलने की वजह से वह बेटी भाइयों के बगल में ही रहकर बेटे की अच्छे से परवरिश कर रही है।
-भारत का कानून किसी महिला को अपने पिता की पुश्तैनी संपति में पूरा अधिकार देता है। अगर पिता ने खुद जमा की संपति की कोई वसीयत नहीं की है, तब उनकी मृत्यु के बाद संपत्ति में बेटी को भी उसके भाइयों और मां जितना ही हिस्सा मिलेगा। यहां तक कि शादी के बाद भी यह अधिकार बरकरार रहता है।
-आपको एक सलाह देना चाहता हूं कि बेटी के साथ प्रॉपर्टी बांटने में कतई अन्याय न करें। आप बेटी को बैंक में जमा धनराशि या प्रॉपर्टी में से एक उचित हिस्सा वसीयतनाामा के जरिए बेटी के नाम भी लिख दें ताकि माता-पिता की मौक के बाद उनकी प्रॉपर्टी पर उसे अधिकार आसानी से मिल जाए।
-मैं कानून का छात्र रहा हूं। याद रखिए, बेटियों को पिता की प्रॉपर्टी पर हक है पर इस पर माता-पिता या भाई अंजान बने रहते हैं। मासूम बहनें प्रॉपर्टी पर दावा नहीं ठोकतीं। आपको बता दूं कि भारत का कानून किसी महिला को अपने पिता की पुश्तैनी संपति में पूरा अधिकार देता है। अगर पिता ने खुद जमा की संपति की कोई वसीयत नहीं की है, तब भी उनकी मृत्यु के बाद संपत्ति में बेटी को भी उसके भाइयों और मां जितना ही हिस्सा मिलेगा। यहां तक कि शादी के बाद भी यह अधिकार बरकरार रहता है।
-पर मेरी सलाह है कि वसीयतनामा लिख देने से बेटी के लिए रास्ता आसान हो जाता है और बेटे भी इस पर बवाल नहीं करते। आपकी इस पर क्या रया है हमे अवश्य बताइए। यह संपूर्ण मैटर आपकी बेवसाइट पर भी प्रकाशित होगा।