पीली साड़ियों में महिलाओं की छटा अलग ही
वैदिक काल से ही भारत देश का परम्परागत परिधान है साड़ी
हर स्त्री की तरह मुझे भी साड़ियाँ बेहद पसन्द हैं। पर, आज बात करुँगी ‘पीली साड़ी’ की। मैंने अक्सर देखा है महिलाएं पीली साड़ियों में बहुत प्रभावित दिखती हैं। एक अलग सी छवि निखर कर सामने आती हैं।
प्रियंका राय/ पटना

भले ही आज फैशन और सहूलियत को ध्यान में रखते हुए अन्य परिधानों ने भी जगह बना ली है पर फिर भी हर हिंदुस्तानी युवती और महिलाओं के ह्रदय में यह बसती है। इसलिये, हर अच्छे मौके व् अवसर पर वो इसे अवश्य धारण करती हैं।
मर्यादा,परम्परा,संस्कृति-संस्कार सौ प्रतिशत देशी, वैदिक काल से ही स्त्री की पहचान रही साड़ी लज्जा का भी प्रतीक रही है।
घूँघट, आँचल और सम्मान से अलंकृत साड़ियाँ जिसे बचपन में हर बेटी लपेट माँ की नकल करती हैं। और थोड़े बड़े होकर स्कूल, कॉलेजो के फेयरवेल में अंततः चुनाव भी इन्ही प्यारी साड़ियों का होता है।
ये तो हुई साड़ियों पर कुछ सामान्य बातें अब बात इसके कुछ स्पेशल बनाने की। हर स्त्री की तरह मुझे भी साड़ियाँ बेहद पसन्द हैं। पर, आज बात करुँगी ‘पीली साड़ी’ की। मैंने अक्सर देखा है महिलाएं पीली साड़ियों में बहुत प्रभावित दिखती हैं। एक अलग सी छवि निखर कर सामने आती हैं। हालांकि, लाल-पीले रंग हिन्दू समाज में भी शुभ माने जाते हैं। विवाह संस्कारों में भी नई दुल्हन को ‘पियरी’ दिए जाते हैं। कई धार्मिक अवसरों पर भी पीले वस्त्र पहनने की परम्परा है। जैसे अभी हाल ही में बीते बसन्त पंचमी के अवसर पर भी महिलाएं पीली साड़ियाँ अधिकांशत धारण करती हैं जो माहौल और इस अवसर पर एक खूबसूरत छटा जैसी बिखेरती नज़र आती हैं।
बसंत ऋतु का आगमन प्रकृति को बासंती रंग से सराबोर कर जाता है। पिला रंग शुद्ध और सात्विक प्रवृत्ति का प्रतीक माना जाता है। यह सादगी और निर्मलता को भी दर्शाता है। बसंत ऋतु पर पिली सरसों की फसलें खेतों में लहराती हैं और पेड़-पौधों में नई कोपलें फूटती हैं। प्रकृति खेतों को पीले-सुनहरे रंगों से सजा देती है। जिससे पृथ्वी पीली दिखती है। बसंत का स्वागत करने के लिए पहनावा भी विशेष होना चाहिए इसलिए लोग पीले रंग के वस्त्र पहनते हैं। पीला रंग उत्फुल्लता, हल्केपन, व् आत्मविश्वास का आभास देता है।
अब आगे बात साड़ी की शैलियों पर। आज भारत और हिन्दू धर्म सहित दूसरे देशों व् दूसरे धर्मों में भी लोकप्रिय है। साड़ी को भिन्न-भिन्न प्रकार से पहनने की कई शैलियाँ आज मौजूद हैं। ऐसा ज़रूरी नहीं है कि साड़ी पहनने के जिस प्रकार को सबसे अधिक पसन्द किया जाता है, उस प्रकार से ही हमेशा पहनें। साड़ी को पहनने के भी कई तरीक़े हैं। स्त्रियाँ अपनी लम्बाई, कद-काठी और मौके के अनुसार साड़ी पहनती हैं। जैसे- फ्री पल्लू साड़ी, पिनअप साड़ी, उल्टा पल्लू, सीधा पल्लू, लहंगा शैली, और बंगाली शैली, मराठी शैली की साड़ियों को अपनी पसंद के अनुसार पहना जा सकता है।
पर ,बात वही है चाहे इसे जिस शैली में धारण करें पीली साड़ियों की खूबसूरती की झलक मन को हर तरह से भा जाती हैं।