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साढ़े 4 हजार साल पुराने शहर के भग्नावशेष देख मैं रोमांचित था Bihar India 

साढ़े 4 हजार साल पुराने शहर के भग्नावशेष देख मैं रोमांचित था

ईंटों से निर्मित चौकोर घर और इन घरों से पानी के निकास की व्यवस्था तथा सामूहिक आयोजनों के लिए बड़े-बड़े आगार हड़प्पा सभ्यता वासियों के geometric ज्ञान को समकालीन सभ्यताओं में अग्रणी बनाते हैं। वर्तमान में पके ईंटों से बने दो कूप के अवशेष दिखाई दे रहे हैं जो संभवतः पेयजल सप्लाई के लिए बने होंगे।

शत्रुघ्न चौधरी, Ex ADM/पटना
Harppa1हड़प्पा सभ्यता के अवशेषों में से एक लोथल, जो अहमदाबाद से लगभग 80-85 किलोमीटर दूर है, को आज मैंने अपनी पत्नी के साथ देखा । मैं  समुद्र के किनारे बसे लगभग 4,500 वर्ष पुराने शहर के भग्नावशेष को देख और कल्पना करने से रोमांचित हुए बग़ैर नहीं रह सका।
समुद्री ज्वार के समय बड़ी-बड़ी नौकाओं को बंदरगाह पर लाने, सामान उतार-चढ़ाव कर पुनः समुद्र के रास्ते व्यापार का अविश्वसनीय प्रबंधन इस स्थान की खासियत थी।
तब सामान रखने के लिए वेयरहाउस, व्यवसाय एवं प्रबंधन से संबंधित व्यक्तियों के वैज्ञानिक आवास की अद्भुत व्यवस्था इसकी विशिष्टता रही। बंदरगाह का चतुर्भुजीय अवशेष,  इसमें प्रयुक्त पके हुए ईंट और इनके आकार तथा पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने के उपाय (वर्तमान के स्लुइस गेट सदृश्य) अचंभित करते हैं।
h3ईंटों से निर्मित चौकोर घर और इन घरों से पानी के निकास की व्यवस्था तथा सामूहिक आयोजनों के लिए बड़े-बड़े आगार हड़प्पा सभ्यता वासियों के geometric ज्ञान को समकालीन सभ्यताओं में अग्रणी बनाते हैं।
वर्तमान में पके ईंटों से बने दो कूप के अवशेष दिखाई दे रहे हैं जो संभवतः पेयजल सप्लाई के लिए बने होंगे। ऐसा प्रतीत होता है कि कूप अभी हाल फिलहाल ( तीन -चार सौ वर्ष ) के बने हुए हैं।
कई स्थलों पर आधी-अधूरी खुदाई की गयी है और इन स्थलों को अभी तक चिन्हित नहीं किया जा सका है कि वहाँ पर किस तरह के निर्माण हुए थे। लोथल में तत्कालीन बर्तनों के टुकड़े यत्र -तत्र पडे़ हुए हैं। इस स्थान पर एक संग्रहालय बनाया गया है जिसमें यहाँ की खुदाई से प्राप्त वस्तुओं को प्रदर्शित किया जा रहा है, जो इतिहास के विद्यार्थियों के लिए लाभकारी है। संग्रहालय में वस्तुओं के फोटो लेने पर प्रतिबंध है, परन्तु इनके प्राप्य स्थलों को सर्वसाधारण की दया पर छोड़ दिया गया है जो चिंतनीय है।
वैसे तो खुदाई स्थल की घेराबंदी की गयी है लेकिन पूर्ण excavation site आम आदमी के उन्मुक्त आचरण के लिए अप्रतिबंधित है जिससे लोथल के अवशेषों पर क्षरण का खतरा बढ़ गया है क्योंकि पर्यटकों की संख्या दिनानुदिन बढती जा रही है । इसके समुचित संरक्षण की कारगर व्यवस्था किए जाने की नितांत आवश्यकता है।

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