ये लोग थोड़े हैं, इनकी पराजय सुनिश्चित
एक देश है इज़राइल, 80 लाख आबादी है लेकिन मुस्लिम और ईसाइयों को उसने अपने वश में कर रखा है। उनसे हिन्दुओं को सीखने की जरूरत है। वही एकमात्र रास्ता है। हर हिंदु परिवार अपने को आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से शक्तिशाली करें ऐसे उपाय सुझाने चाहिए।
महेंद्र प्रताप भट्ट/ इलाहाबाद
आजकल सोशल मीडिया में धार्मिक नफरत के अभियान में तेजी आई है। यह कमोबेश एक समान रूप से सभी धर्मों के मानने वालों में देखी जा सकती है। मैं बेशक कट्टर जिहादियों का समर्थक नहीं लेकिन इस तरह के प्रचार और विचारों से मै सहमत नहीं। ये तो दूसरी तरह का कठमुल्लावाद है।
वे किसको संबोधित कर रहे हैं, उन हिन्दुओं को जोकि दुनिया में सबसे ज्यादा डरपोक कौम है। उसमें निडरता और प्रखर विचारशीलता के बीज बोने की जरूरत है।
क्षमा करना, उनके तथ्य सच हों या कपोलकल्पित, लेकिन ये हमे सिर्फ अंधी और सड़ांध गलियों में गुम कर देंगे।फौरी तौर पर वे भाजपा के लिए जनमत तैयार करने में शायद सफल भी हो जाँए, लेकिन हिन्दुओं का अहित निश्चित ही करेंगे। उसी तरह जैसे आज तक तथाकथित राष्ट्रवादी लोगों ने किया।
एक देश है इज़राइल, 80 लाख आबादी है लेकिन मुस्लिम और ईसाइयों को उसने अपने वश में कर रखा है। उनसे हिन्दुओं को सीखने की जरूरत है। वही एकमात्र रास्ता है। हर हिंदु परिवार अपने को आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से शक्तिशाली करें ऐसे उपाय सुझाने चाहिए।
रही बात मुसलमानों की, आपको शायद जानकारी न हो, कई सेक्ट (फिरकों) में बँटे है। उनमें वहाबी लोगों का ही मुकाबला करना चाहिए। केवल इनकी सोच कट्टर और मानवता विरोधी है। ऐसे लोगों के खिलाफ दुनिया एक हो रही है। विश्व की राजनीति भी इसी दिशा में जा रही है। ये लोग थोड़े हैं और इनकी पराजय सुनिश्चित है।
इस मामले में मोदी तथा आर एस एस की भी यही विचारधारा होगी जो साफ दिखाई देती है।
ये बार बार मुस्लिम विरोधी अभियान के शिकार होने से अच्छा है कि इनमें से अच्छे लोगों को बढ़ावा दिया जाए। इस तरह के विचारों से बंटे हुए मुस्लिम एक हो जाते हैं। मोदी बेवकूफ़ नहीं है और न ही वे डरते हैं जो आजतक आप जैसे लोगों की भाषा का इस्तेमाल नहीं करते।