शादी में दहेज की डिमांड भयावह स्थिति में पहुंची
किसी बेटहा वालों को नहीं पता कि कहां तक मांगें?
by Roy Tapan Bharati
वह विचलित थीं। परेशान थीं। हैरान थीं, भौंचक थीं। वह बेटी की शादी त
य न होने से उतनी दुखी नहीं थी जितना लड़के वालों के उल-जुलूल सवालों से। वह खुद काबिल हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त हैं। लेक्चरर की नौकरी करती हैं। 30-32 साल पहले उनके वक्त में भी दहेज का यह आलम नहीं था। जाहिल बेटहा वालों के सवालों ने उनका मन दुखी कर रखा है।
क्या हर लड़का वाले का परिवार ऐसी ही बातें करता है? अतार्किक बातें। शादी की बातचीत टूट जाने पर भी लड़की को आधी रात में फोन कर देना। आखिर बेटी वाला कितना सहे? लड़के वाले के लिए सारी बेहूदी बातों की छूट? फोन करने के समय का भी ख्याल नहीं। आधी रात में भी फोन कर देना। आखिर बेटिहा वाला कितना सहे? क्या बेटे वालों को लड़की वालों से बात करने की तहजीब नहीं सिखाई जा सकती? क्या यहां इंसाफ नहीं है?
अब एक दूसरी कहानी। बिहार के मगध क्षेत्र में एक लड़का असिस्टेंट कमिश्नर बना है। उसका दावा है कि उसके घर पर लड़की वालो की लाइन लग रही है। “साला मैं तो साहेब बन गया” की तर्ज पर यह परिवार अभी इतरा रहा है। लड़की वालों को दुखी कर रखा है। खुद की तनख्वाह अभी 40-50 हजार से अधिक नहीं होगी। पर बैंक में 60-70 हजार का वेतन कमाने वाली एक लड़की के पिता ने शादी के लिए अप्रोच किया तो गजब की डिमांड शुरू हो गई।
लड़की का पिता अपनी बेटी को खुशहाल देखना चाहते हैं। वे शहर में 4 कट्ठा जमीन और 20 लाख नकद देने को तैयार हो गए। इस पर भी उनकी दहेज-भूख नहीं मिटी। साफ शब्दों में बेटिहा को कहा, आपका 20 लाख तो हम छुएंगे भी नहीं। बारात लाने और ले जाने वाली गाड़ी और जेवरात का खर्च आपको अलग से देना होगा। 4 कट्ठा जमीन की कीमत 80 लाख और 20 लाख नकद। एक करोड़ दहेज देने पर भी इसकी दहेज-भूख मिट नहीं रही। इस एक करोड़ को बैंक में एफडी कर दें तो कम से कम 70 हजार रुपये मासिक ब्याज आएगा। यानी लड़के की तनख्वाह से भी ज्यादा। घर में सबने मिलकर तय किया कि बेटे के असि. कमिश्नर बनने से सब पगला गए हैं। इसे काबिल लड़की नहीं बल्कि इसे केवल धन चाहिए।
ऐसे लोग शादी की बातचीत शुरू करेंगे कि हम दहेज नहीं लेते। फिर कुछ ही राउंड की बात के बाद पर्दा खुल जाता कि बिना मोटी रकम खर्च किए शादी हो ही नहीं सकती। बेटे की शादी के सारे अरमान बेटी वाला ही पूरा कर दे। वाह, इंजीनियर बहू भी मिल जाए और ऊपर से मोटा दहेज भी। ऐसी शर्तों वाली शादी तो एकदम संभव नहीं। पर कितने बेटी वाले अटल रहते हैं। बहुत सारे बेटी वाले जमीन-मकान और बैंक एफडी तोड़कर अपनी बेटी की शादी कर देना चाहते हैं। आखिर बेटी वाला कहां तक झुके?
शादी में दहेज की डिमांड अब भयावह स्थिति में पहुंच गई है। किसी को भी नहीं पता कि कहां तक मांगें? सरकारी नौकरी हासिल करने वाले बेटों के बाप तो इतरा रहे हैं। हालात इतनी गंभीर है कि भावी आईएएस का दावा कर रांची का एक बेटहा वाला 50 लाख की डिमांड करता रहा जबकि बेटा जूनियर अफसर था। इस पद पर रहा तो हमेशा छोटी जगहों पर ही पोस्टिंग रही। सुना है कि उस लड़के की शादी हो गई। पर कितने दहेज में ? यह अब तक पता नहीं?